नई दिल्ली:

भारतीय और वैश्विक सर्राफा बाजारों में आज एक ही चर्चा है—चांदी की ऐतिहासिक गिरावट। जो चांदी पिछले महीने जनवरी 2026 में ₹4.20 लाख प्रति किलोग्राम के जादुई और डरावने आंकड़े को पार कर गई थी, आज 15 फरवरी 2026 को वह ₹2.75 लाख के स्तर पर संघर्ष कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पिछले 6 वर्षों में चांदी की तीसरी सबसे बड़ी गिरावट है, जिसने निवेशकों के करोड़ों रुपये कुछ ही दिनों में साफ कर दिए हैं।

6 साल की तीसरी सबसे बड़ी गिरावट: एक विश्लेषण

पिछले 6 वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो चांदी ने समय-समय पर बड़े झटके दिए हैं, लेकिन फरवरी 2026 का यह 'मेल्टडाउन' विशेष रूप से चर्चा में है।

  • पहली बड़ी गिरावट: 2020 के कोविड काल के दौरान देखी गई थी।
  • दूसरी बड़ी गिरावट: 2022-23 में ब्याज दरों में अचानक हुई बढ़ोतरी के समय आई थी।
  • तीसरी बड़ी गिरावट (वर्तमान): जनवरी के शिखर से अब तक लगभग 35% से 40% तक की गिरावट।

यह गिरावट इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यह केवल मांग में कमी के कारण नहीं, बल्कि 'मार्केट शासन' (Market Regime) में बदलाव और तकनीकी खराबी (Technical Breakdown) के कारण आई है।


वैश्विक स्तर पर क्या हुआ? 'वॉर्श शॉक' और डॉलर की मजबूती

चांदी की कीमतों को गिराने में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिका से आई एक खबर ने निभाई। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में नामित किए जाने की खबर ने बाजारों को हिला दिया। वॉर्श को एक 'हॉक' (सख्त नीति वाला) माना जाता है, जो महंगाई को रोकने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखने के पक्षधर हैं।

जैसे ही यह खबर आई:

  • अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले जबरदस्त मजबूत हो गया।
  • ट्रेजरी यील्ड (Bond Yields) 4.3% के करीब पहुंच गई।

चूँकि चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए निवेशकों ने चांदी बेचकर डॉलर और बॉन्ड्स में पैसा लगाना शुरू कर दिया।

तकनीकी ब्रेकडाउन: जब मशीनों ने शुरू की बिकवाली

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट इंसानों से ज्यादा 'एल्गोरिदम' (कंप्यूटर प्रोग्राम) ने बढ़ाई है।

  • मार्जिन कॉल का दबाव: जब कीमतें गिरने लगीं, तो एक्सचेंजों (CME और MCX) ने ट्रेडिंग के लिए 'मार्जिन' बढ़ा दिया। जिन व्यापारियों के पास अतिरिक्त कैश नहीं था, उनके सौदे मशीनों द्वारा खुद-ब-खुद काट दिए गए।
  • सपोर्ट लेवल्स का टूटना: जैसे ही चांदी ₹3.20 लाख और फिर ₹3 लाख के 'सपोर्ट लेवल' से नीचे गिरी, बाजार में 'स्टॉप-लॉस' ट्रिगर हो गए। इसे तकनीकी भाषा में 'डेथ क्रॉस' की स्थिति कहा जा रहा है, जहाँ बिकवाली का दबाव खुद-ब-खुद बढ़ता चला जाता है।

औद्योगिक मांग का बदलता स्वरूप: क्या विकल्प ढूंढे जा रहे हैं?

एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। चांदी की कीमतें जब ₹4 लाख के पार गईं, तो सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माताओं ने इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, चीन और ताइवान की कंपनियों ने चांदी की जगह तांबे (Copper) के इस्तेमाल में सफलता हासिल की है। इस 'सब्स्टीट्यूशन' (विकल्प) के डर ने भी चांदी की चमक कम कर दी है।

भारतीय बाज़ार का हाल: आम आदमी की उलझन

भारत में आज महाशिवरात्रि का पर्व भी है। सर्राफा बाजारों में हलचल तो है, लेकिन खरीदार डरे हुए हैं। दिल्ली और मुंबई के बाजारों में चांदी ₹2.75 लाख से ₹2.80 लाख के आसपास मिल रही है।

  • खरीदारों के लिए: जो लोग ₹4 लाख पर खरीदने से चूक गए थे, उनके लिए यह राहत है।
  • निवेशकों के लिए: जिन्होंने ऊंचाई पर पैसा लगाया था, वे भारी 'पेपर लॉस' में हैं।

क्याअब सुधार आएगा?

15 फरवरी 2026 की यह स्थिति बताती है कि चांदी का 'बुल रन' (तेजी का दौर) फिलहाल थम गया है। हालांकि, तकनीकी रूप से चांदी अब 'ओवरसोल्ड' (ज़रूरत से ज्यादा बिक चुकी) ज़ोन में है, जिसका मतलब है कि यहाँ से एक छोटा सुधार (Technical Bounce) आ सकता है। लेकिन निवेशकों को सावधान रहना चाहिए—इसे विशेषज्ञों ने 'डेड कैट बाउंस' (अस्थायी सुधार) की संज्ञा दी है।

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