नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ हफ्तों से आसमान छू रही चांदी अब नीचे की ओर फिसलती नजर आ रही है। सोमवार, 16 मार्च 2026 को बाजार खुलते ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और हाजिर बाजार (Spot Market) दोनों जगह बिकवाली का भारी दबाव देखा गया।

MCX पर चांदी का हाल

आज सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव ₹2,54,367 से ₹2,56,340 प्रति किलोग्राम के दायरे में ट्रेड करता हुआ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में ही इसमें ₹5,000 से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी करीब ₹2,59,435 के स्तर पर बंद हुई थी, लेकिन आज यह काफी नीचे खुली और गिरावट बढ़ती चली गई।

प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा रेट (16 मार्च 2026)

देश के अलग-अलग शहरों में चांदी की कीमतों में मामूली अंतर देखा जा रहा है, लेकिन ट्रेंड हर जगह गिरावट का ही है:

  • दिल्ली: राजधानी में चांदी की कीमत लगभग ₹2,74,900 प्रति किलोग्राम बताई जा रही है।
  • मुंबई: आर्थिक राजधानी में भी भाव ₹2,74,900 प्रति किलो के आसपास बना हुआ है।
  • चेन्नई और हैदराबाद: दक्षिण भारत के इन शहरों में चांदी का भाव थोड़ा प्रीमियम पर यानी ₹2,79,900 प्रति किलो के आसपास है।
  • कोलकाता और बेंगलुरु: यहाँ भी कीमतें ₹2,74,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर स्थिर होती दिख रही हैं।


चांदी क्यों हो रही है सस्ती? (मुख्य कारण)

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू फैक्टर्स जिम्मेदार हैं:

  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती: वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स में तेजी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर दबाव बना है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धातुओं का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के लिए चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है।
  • ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली: इस साल जनवरी में चांदी ₹4.20 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई थी। इतनी बड़ी तेजी के बाद अब बड़े निवेशक और ट्रेडर्स अपना मुनाफा वसूल (Profit Booking) कर रहे हैं, जिससे कीमतों में "करेक्शन" (सुधार) हो रहा है।
  • औद्योगिक मांग में नरमी: चांदी का 50% से अधिक उपयोग औद्योगिक कार्यों, जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। वैश्विक स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र में आई हल्की सुस्ती ने चांदी की औद्योगिक मांग को थोड़ा प्रभावित किया है।
  • मध्य-पूर्व संकट का बदलता रुख: हालाँकि युद्ध की स्थिति में कीमती धातुएं महंगी होती हैं, लेकिन वर्तमान में निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर और बॉन्ड की ओर ज्यादा है, जिससे बुलियन मार्केट की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है।

आगे क्या हो सकती है चाल?

तकनीकी जानकारों का मानना है कि चांदी के लिए ₹2,50,000–₹2,55,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि बाजार इस स्तर से नीचे जाता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर की तरह देखी जा रही है क्योंकि भविष्य में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग बरकरार रहने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story