बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से फिसला सेंसेक्स-निफ्टी; लाल निशान पर बंद
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बीच वित्तीय बैंकिंग सेक्टर के भारी दबाव से घरेलू बाजार में सुस्ती रही।

शेयर बाजार में आई भारी गिरावट और बिकवाली के दबाव को प्रदर्शित करता हुआ एक विवरणात्मक डिजिटल ग्राफिक चित्र।
Share market closing updates : घरेलू शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन उतार-चढ़ाव की एक ऐसी अनिश्चित कहानी लेकर आया, जिसने दलाल स्ट्रीट के गलियारों में हलचल तेज कर दी। शुरुआती कारोबार में दिखी तेजी और सकारात्मकता के बाद दिन ढलते-ढलते बाजार ने अपनी पूरी बढ़त खो दी और अंततः बैंकिंग व वित्तीय शेयरों में आई भारी कमजोरी के कारण लाल निशान पर बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे केवल घरेलू बिकवाली ही जिम्मेदार नहीं थी, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक संकट ने भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव ने भारतीय बाजार के निवेशकों को बेहद सतर्क और रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप मुनाफावसूली का दौर हावी रहा और बाजार की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया।
दलाल स्ट्रीट के मुख्य संवेदी सूचकांकों की चाल को विस्तार से देखें तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) कारोबार के अंत में 141.90 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,867.80 के स्तर पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत काफी मजबूत और उत्साहजनक रही थी, लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक मोर्चे से सतर्क करने वाली खबरें आईं, बाजार में ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) सूचकांक भी इस गिरावट से अछूता नहीं रह सका और वह भी 6.55 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली सुस्ती दिखाते हुए 23,907.15 के स्तर पर जाकर ठहर गया। दोनों सूचकांकों का इस तरह लाल निशान में जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार उच्च स्तरों पर टिकने के लिए अभी और सकारात्मक ट्रिगर्स का इंतजार कर रहा है।
इस गिरावट के मुख्य कारणों और सेक्टोरल प्रदर्शन का विश्लेषण करने पर यह साफ हो जाता है कि बाजार को नीचे धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की रही। बुधवार को हुए कारोबार में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC), दिग्गज निजी बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (HDFC Life Insurance) जैसे हैवीवेट शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई, जिसने सूचकांकों पर सीधा दबाव बनाया। हालांकि, इस चौतरफा सुस्ती के बीच कुछ सरकारी और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को संभालने का भरपूर प्रयास किया। बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख काउंटरों में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, एनटीपीसी (NTPC), इटरनल, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स शामिल रहे, जिन्होंने निचले स्तरों पर अच्छी खरीदारी के दम पर बाजार की बड़ी गिरावट को रोक दिया।
इस मुख्य सूचकांकों की गिरावट के इतर, मझोले और छोटे शेयरों यानी ब्रॉडर मार्केट का रुख काफी सकारात्मक और राहत देने वाला रहा। निवेशकों ने लार्जकैप शेयरों के बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में वैल्यू बाइंग को प्राथमिकता दी, जिसके चलते निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.42 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.15 प्रतिशत की सम्मानजनक बढ़त दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों और आधिकारिक स्रोतों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार की जा रही पूंजी की निकासी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनातनी के कारण बड़े संस्थागत खरीदार फिलहाल बड़ी पोजीशन बनाने से बच रहे हैं, जिससे आने वाले कुछ सत्रों में भी बाजार में ऐसी ही सतर्कता और सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
