दलाल स्ट्रीट का 'सस्पेंस थ्रिलर': क्रैश होते-होते संभला बाजार; आखिरी घंटे में निवेशकों की लौटी मुस्कान
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच शुरुआती सत्र में 670 अंक से अधिक टूटने के बाद आखिरी घंटे में घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से संभला बाजार।

वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी के रुख और सूचकांकों के ऊपर चढ़ने के ग्राफ को दर्शाता एक ग्राफिक्स।
Share Market Closing Bell Wednesday : पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और वैश्विक बाजारों से मिल रहे बेहद अनिश्चित और मिले-जुले संकेतों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। बिकवाली के भारी दबाव में एक समय पूरी तरह क्रैश होने की कगार पर पहुंचे दलाल स्ट्रीट ने आखिरी घंटे में शानदार और तूफानी वापसी करते हुए रीछों के चंगुल से खुद को आजाद करा लिया। शुरुआती कारोबारी सत्र में भारी गिरावट का सामना करने के बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों की आक्रामक खरीदारी के दम पर बाजार अंततः हरे निशान पर बंद होने में कामयाब रहा। इस उतार-चढ़ाव भरे बेहद रोमांचक सत्र के समापन पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 117.54 अंकों यानी 0.16 प्रतिशत की मजबूती के साथ 75,318.39 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 41 अंकों की बढ़त दर्ज करता हुआ 23,659 के स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहा।
बुधवार सुबह जब बाजार खुला तो निवेशकों के मन में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर भारी दहशत साफ दिखाई दे रही थी। 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स पिछले बंद के मुकाबले कमजोरी के साथ 74,806.49 के स्तर पर खुला और देखते ही देखते बिकवाली के भारी दबाव में फिसलकर 74,529.41 के निचले स्तर तक चला गया। इस गिरावट से बाजार में हड़कंप मच गया क्योंकि सेंसेक्स अपने दिन के ऊपरी स्तर से करीब 670 अंक से अधिक टूट चुका था। हालांकि, ठीक इसी समय एनर्जी और ऑटो सेक्टर के दिग्गज शेयरों में आई निचले स्तरों से तूफानी खरीदारी ने पासा पूरी तरह पलट दिया। इस रिकवरी के सहारे सेंसेक्स ने रफ्तार पकड़ी और इंट्रा-डे के दौरान 75,406.18 का उच्चतम स्तर छू लिया। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी भी 23,457.25 पर कमजोर शुरुआत करने के बाद संभला और 23,397.30 के निचले स्तर से बाउंसबैक कर 23,690.90 के दैनिक उच्च स्तर तक जा पहुंचा।
व्यापक बाजार के अंतर्गत अन्य सूचकांकों की स्थिति का विश्लेषण करें तो वहां भी मामूली राहत देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स ने रफ्तार पकड़ते हुए 0.49 प्रतिशत की बढ़त हासिल की, जबकि छोटे शेयरों वाले निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में महज 0.04 प्रतिशत की सुस्त और नाममात्र की तेजी दर्ज की गई। सेक्टोरल परफॉर्मेंस यानी सेक्टरवार प्रदर्शन के मोर्चे पर आज का पूरा मुकाबला एनर्जी सेक्टर के नाम रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और देश के भीतर घरेलू ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होने की उम्मीदों ने पंख लगा दिए। इसी रणनीतिक वजह से ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा 1.59 प्रतिशत का जोरदार उछाल देखा गया। इस तेजी की लहर ने निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल को भी अपने प्रभाव में लिया और ये सेक्टर मजबूती के साथ बंद हुए। इसके उलट मुनाफे की वसूली के कारण निफ्टी मीडिया में 1.45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई, जबकि निफ्टी एफएमसीजी, आईटी और फार्मा सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए।
व्यक्तिगत शेयरों की हलचल पर नजर डालें तो निफ्टी 50 के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शेयरों में हिंडाल्को, बजाज-ऑटो, ग्रासिम, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, विप्रो और इंडिगो शामिल रहे, जिन्होंने अपनी आक्रामक लिफ्टिंग से बाजार को सहारा दिया। इसके विपरीत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), टेक महिंद्रा, इटरनल, टाटा स्टील, एसबीआई लाइफ और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों को निवेशकों की बेरुखी का सामना करना पड़ा और ये आज के सत्र के टॉप लूजर्स बनकर उभरे। इस उतार-चढ़ाव का सबसे सुखद परिणाम देश के वेल्थ क्रिएशन पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 459 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 461 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े पर पहुंच गया, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस कड़े और जोखिम भरे कारोबारी सत्र में भारतीय निवेशकों की झोली में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा आया है।
आज के इस उतार-चढ़ाव भरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कानूनी और वित्तीय संदेश यह है कि वैश्विक कूटनीतिक और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बेहद ठोस बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की उठापटक को भांपकर घरेलू रिफाइनिंग कंपनियों में संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) द्वारा किया गया भारी निवेश यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार अब वैश्विक झटकों को सहने की पूरी कानूनी और वित्तीय क्षमता विकसित कर चुका है। आज की क्लोजिंग ने यह साबित कर दिया है कि भले ही शुरुआती सत्रों में बिकवाल हावी हो जाएं, लेकिन घरेलू लिक्विडिटी और मजबूत आर्थिक संकेतकों के रहते भारतीय बाजार को लंबे समय तक मंदी के दौर में धकेलना नामुमकिन है, जो आने वाले दिनों के लिए एक बेहद सकारात्मक और टिकाऊ संकेत है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
