पश्चिम एशिया में शांति की नई उम्मीदों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते आज वैश्विक बाजारों सहित भारतीय घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति समझौता अंतिम चरण में पहुंचने की खबरों ने दुनिया भर के निवेशकों में एक नया उत्साह फूंक दिया है। इसी सकारात्मक वैश्विक रुख का असर आज सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के खुलते ही देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में ही दलाल स्ट्रीट पर खरीदारों ने चौतरफा लिवाली की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी दोनों ही रिकॉर्ड गति से ऊपर की ओर अग्रसर हैं, जिससे बाजार पूंजीकरण में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

बाजार के खुलते ही सुबह 9.17 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदनशील सूचकांक सेंसेक्स 1040.51 अंक यानी 1.38 प्रतिशत की भारी-भरकम तेजी के साथ 76,568.46 अंक पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती मिनटों में ही यह उछाल 1,100 अंकों के स्तर को भी पार कर गया, जिसने निवेशकों को पिछले कुछ समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से बड़ी राहत दी। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और वह 343.90 अंक यानी 1.46 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 23,966.80 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रुख पूरे दिन बना रहा तो सूचकांक नए शिखर को छू सकते हैं। इस चौतरफा तेजी के माहौल में बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे भारी वजन वाले शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखी जा रही है।

इस ऐतिहासिक तेजी का मुख्य श्रेय अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते को जाता है, जिसने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बने अनिश्चितता के बादलों को पूरी तरह से हटा दिया है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है, जो भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देश के लिए एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत है। कच्चे तेल के दाम गिरने से भारत के चालू खाता घाटे (CAD) में कमी आने की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में एक बार फिर लौटता हुआ दिखाई दे रहा है।

वैश्विक बाजार के इस अनुकूल माहौल का सीधा सकारात्मक प्रभाव भारतीय मुद्रा 'रुपये' पर भी देखने को मिला है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया जबरदस्त मजबूती के साथ खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.11 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि आज यह बड़ी छलांग लगाते हुए 94.68 प्रति डॉलर पर खुला। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर बीते 8 मई के बाद से रुपये का सबसे उच्चतम स्तर है। रुपये में आई यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक स्थिरता और विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रवाह को रेखांकित करती है, जिससे आयातकों को बड़ी राहत मिलेगी और देश में मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में सहायता मिलेगी।

आधिकारिक और तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो इस बाजार रैली को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की निरंतर लिवाली और वैश्विक फ्यूचर्स मार्केट से मिले मजबूत संकेतों से भी बल मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी (SEBI) की नियामक नीतियों के प्रति निवेशकों का भरोसा हमेशा से सुदृढ़ रहा है, और अब बाहरी भू-राजनीतिक संकट के टलने से बाजार को आगे बढ़ने के लिए एक स्पष्ट और स्वच्छ रास्ता मिल गया है। इस शानदार बाजार शुरुआत का समापन इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले सत्रों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और कच्चे तेल की कीमतों का व्यवहार कैसा रहता है। बहरहाल, आज की इस शानदार बढ़त ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर शांति की कोई भी पहल सीधे तौर पर आर्थिक समृद्धि और वित्तीय बाजारों के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी सुधार देखने को मिल रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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