पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले प्रतिकूल संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। सप्ताह के कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार भारी बिकवाली के दबाव में नजर आया, जिससे निवेशकों में अफरातफरी का माहौल बना रहा। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 77,279.09 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 इंडेक्स भी 178 अंकों की गिरावट दर्ज करते हुए 24,148.30 के स्तर पर लुढ़क गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका दिया है, खासकर बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है।

बाजार में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सीधा तनाव है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह संघर्ष को बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई इस कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं को गहरा कर दिया है। इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहां ब्रेंट क्रूड 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.2 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार घाटे के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र इस गिरावट के केंद्र में रहे। सेंसेक्स के प्रमुख 30 शेयरों में से 21 लाल निशान पर खुले। महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 1.35 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई, जबकि एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज बैंकिंग शेयर भी बिकवाली के दबाव से नहीं बच सके। रिलायंस इंडस्ट्रीज और मारुति सुजुकी के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आईटी और फार्मा सेक्टर के कुछ शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की। एशियन पेंट्स, बीईएल, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और सन फार्मा जैसे शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई, जो निवेशकों के लिए राहत की बात रही।

विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये की स्थिति नाजुक रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.58 के स्तर पर खुला, जो पिछले सत्र के 94.25 के बंद भाव से काफी नीचे है। डॉलर की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से फंड निकालने की संभावनाओं ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बड़े निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाजार का रुख किसी भी दिशा में मुड़ सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story