नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारी गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में गहराते संकट और युद्ध की परिस्थितियों ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है, जिसका सीधा और व्यापक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबारी सत्र में ही बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 500 से अधिक अंकों तक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी50 सूचकांक भी अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से काफी नीचे खिसक गया। इस बिकवाली के चलते बाजार के प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 284.51 अंक यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,061.66 अंक पर कारोबार करता देखा गया। इसी तरह, निफ्टी50 इंडेक्स भी 67.25 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,338.35 अंक के स्तर पर आ गया, जो शुरुआती दौर में 24,300 अंक के स्तर को भी तोड़ चुका था। इस व्यापक उथल-पुथल के बीच मुद्रा बाजार से राहत की एक हल्की किरण दिखाई दी, जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे की मजबूती के साथ 95.69 के स्तर पर खुला। हालांकि, इस मामूली सुधार का असर शेयर बाजार की नकारात्मक धारणा को बदलने में नाकाम रहा।

सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में से 18 प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान यानी गिरावट के साथ खुले। शुरुआती सत्र में सबसे अधिक नुकसान ट्रेंट के शेयरों को हुआ, जिसमें 1.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त सूचना प्रौद्योगिकी और बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे इन्फोसिस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, सन फार्मा, कोटक बैंक और एचसीएल टेक के शेयरों में भी बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। इसके विपरीत, बाजार में इस चौतरफा गिरावट के बावजूद कुछ चुनिंदा शेयरों जैसे अडानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, इटरनल, टेक महिंद्रा, टाइटन, बीईएल, टीसीएस, एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर में खरीदारी देखी गई, जिससे इन शेयरों को मामूली सहारा मिला।

ब्रॉडर मार्केट यानी व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों पर भी दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत तथा निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.15 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स के विश्लेषण के अनुसार, इस गिरावट का नेतृत्व मुख्य रूप से निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने किया, जहां सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में भी निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी केमिकल सेक्टर्स में मामूली बढ़त देखी गई, जिसने बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचाया।

इस बाजार गिरावट के पीछे सबसे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं। हाल ही में ईरान द्वारा कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किए गए मिसाइल हमले के बाद वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। हालांकि अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने इन मिसाइलों को बीच में ही मार गिराने का दावा किया है और ईरान के एक द्वीप पर जवाबी कार्रवाई की है, लेकिन युद्ध की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करने पर सहमत हो गया है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी आई है। भारतीय बाजार में इस समय निवेशक रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों का भी इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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