पश्चिम एशिया में गहराते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार धराशायी: सेंसेक्स 900 अंक फिसला, निवेशकों के करोड़ों स्वाहा|
वैश्विक तनाव के कारण भारतीय बाजार में हाहाकार मचा और रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 94.88 के स्तर पर पहुंच गया।

मुंबई स्थित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत के ऊपर गिरते हुए बाजार को दर्शाते लाल तीर|
नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को लगे करारे झटके ने आज भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। सप्ताह के कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का ऐसा दबाव देखा गया कि प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और युद्ध की आहट ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू इक्विटी बाजार और भारतीय मुद्रा की सेहत पर दिखाई दे रहा है। बाजार के खुलते ही बिकवाली का दौर शुरू हुआ, जिसने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे धकेल दिया।
कारोबारी आंकड़ों पर नजर डालें तो सुबह के शुरुआती सत्र में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ गोता लगा गया। सुबह लगभग साढ़े नौ बजे तक यह गिरावट और गहरी हुई और सेंसेक्स 934.01 अंक यानी 1.21 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 76,394.18 अंक के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार की इस मंदी ने निवेशकों की पूंजी को बड़ा झटका दिया है। केवल सेंसेक्स ही नहीं, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 भी लाल निशान की चपेट में रहा। निफ्टी 234.60 अंक या 0.97 प्रतिशत फिसलकर 23,941.55 के स्तर पर आ गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी ने इस गिरावट को हवा दी है।
बाजार में मचे इस कोहराम के बीच भारतीय रुपया भी दबाव से अछूता नहीं रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.88 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.48 पर बंद हुआ था। मुद्रा बाजार में यह कमजोरी सीधे तौर पर भारत के आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकती है। पश्चिम एशिया से आने वाली नकारात्मक खबरों ने मुद्रा व्यापारियों को सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे घरेलू मुद्रा के मूल्य में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण बताता है कि पश्चिम एशिया में शांति वार्ता विफल होने की रिपोर्टों ने वैश्विक स्तर पर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने का संकेत दिया है। भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ऐसी स्थितियों में अपनी होल्डिंग्स कम करते हैं। आज के कारोबार में बैंकिंग, आईटी और ऑटो जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों के शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता और तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ता है, तो बाजार में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। निवेशकों को फिलहाल संभलकर चलने और वैश्विक घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
