शेयर बाजार में भारी गिरावट: पश्चिम एशिया संकट के चलते सेंसेक्स 400 अंक से अधिक टूटा, निफ्टी 23,100 के नीचे पहुंचा
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से भारतीय शेयर बाजार सहमा, सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच शेयर बाजार के सूचकांकों में आई भारी गिरावट से चिंतित ट्रेडिंग फ्लोर पर मौजूद निवेशक।
नई दिल्ली: वैश्विक राजनीतिक पटल पर उभरते नए भू-राजनीतिक संकटों का सीधा और गहरा असर आज भारतीय वित्तीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़े भारी तनाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण घरेलू शेयर बाजार में व्यापार की शुरुआत होते ही जबरदस्त बिकवाली का माहौल बन गया। शुरुआती कारोबारी सत्र में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 400 अंकों से भी अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी-50 सूचकांक ने 23,100 अंक के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को नीचे की ओर तोड़ दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ देखी जा रही है।
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, बीएसई सेंसेक्स पिछले सत्र में 73,983.18 अंक पर बंद हुआ था, जो आज भारी दबाव के बीच 73,615.99 अंक के निचले स्तर पर खुला। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर सूचकांक 289.38 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,693.80 अंक पर संघर्ष करता नजर आया। इसी प्रकार, निफ्टी भी 75.30 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज करते हुए 23,139.65 अंक पर आ गया। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल के आयात बिल बढ़ने की आशंका के कारण भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे की कमजोरी के साथ 95.60 पर खुला, जिसने घरेलू बाजार के संकट को और गहरा कर दिया है।
इस व्यापक मंदी के दौरान बाजार का अंदरूनी ढांचा बेहद कमजोर नजर आया। सेंसेक्स के प्रमुख 30 शेयरों में से 26 शेयर पूरी तरह से लाल निशान यानी गिरावट के साथ खुले। इस सत्र में सबसे अधिक मार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के शेयरों पर पड़ी है। प्रमुख आईटी कंपनी एचसीएल टेक का शेयर 2.96 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ खुला। इसके अतिरिक्त इंफोसिस, इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाइटन, टीसीएस, एशियन पेंट्स और टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस विपरीत परिस्थिति में भी पावरग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और भारती एयरटेल जैसी कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में मामूली तेजी का रुख देखा गया, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला।
व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) की बात करें तो वहां भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। निफ्टी पर एचसीएल टेक, इंफोसिस और टेक महिंद्रा शीर्ष गिरावट वाले शेयरों की सूची में शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.61 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.62 प्रतिशत की मंदी दर्ज की गई। क्षेत्रवार विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक मंदी के डर से निफ्टी आईटी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल सेक्टर्स में भी बिकवाली हावी रही, जबकि सुरक्षात्मक निवेश के रूप में देखे जाने वाले निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर सेक्टर्स में सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में अचानक भड़का सैन्य संघर्ष है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के कई सामरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा है कि बातचीत के लिए लंबा समय दिए जाने के बावजूद सकारात्मक रुख न अपनाने की बड़ी कीमत अब ईरान को चुकानी होगी। इस सैन्य टकराव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.72 प्रतिशत की तेजी के साथ 94.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2 प्रतिशत बढ़कर 91.82 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
