पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों सहित घरेलू शेयर बाजार में भी हाहाकार मच गया है। पिछले सत्र में दर्ज की गई मामूली रिकवरी के बाद, आज शुरुआती कारोबार में ही भारतीय शेयर बाजार ने घुटने टेक दिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सुरक्षा संकट और शांति वार्ता में आ रहे गतिरोध के चलते निवेशकों ने घरेलू बाजार से तेजी से कदम पीछे खींचे हैं, जिससे चारों तरफ बिकवाली का माहौल बन गया है।

घरेलू शेयर बाजार के खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 800 अंक से अधिक की भारी गिरावट के साथ धराशायी हो गया। सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 803.13 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 73,846.71 अंक के स्तर पर आ गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी बिकवाली के भारी दबाव को झेल नहीं सका और 24,300 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। निफ्टी 209.35 अंक यानी 0.89 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,274.20 अंक के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार की इस चौतरफा गिरावट ने पिछले चार दिनों के नुकसान के बाद मंगलवार को आई मामूली तेजी के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।

इस बाजार संकट के बीच भारतीय मुद्रा में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज भारी कमजोरी के साथ 95.45 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 17 पैसे टूटकर 95.36 पर बंद हुआ था। बाजार के आंतरिक आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 27 शेयर लाल निशान में खुले। इस मंदी का सबसे बड़ा शिकार आईटी सेक्टर बना है, जहां भारी मुनाफावसूली और बिकवाली देखी गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर सर्वाधिक 4.15 प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, एशियन पेंट्स और बजाज फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस अचानक आई गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में गहराता सुरक्षा संकट है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के हालिया आधिकारिक बयान ने वैश्विक बाजारों की चिंता को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ईरान ने सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट के एक बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं और वहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर ओपन फायरिंग की है। इस आक्रामक घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी एक लंबा समय लग सकता है।

इस क्षेत्रीय तनाव के सीधे प्रभाव स्वरूप वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उबाल आ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.94 प्रतिशत की तेजी के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस माहौल में व्यापक बाजार के अंतर्गत निफ्टी मिडकैप में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि आगामी कुछ सत्रों तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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