शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के डूबे अरबों रुपये! ऑल टाइम लो पर पहुंचकर कांप उठा भारतीय रुपया
वैश्विक बाजारों में मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते निफ्टी 23,450 से नीचे फिसला, डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा 41 पैसे टूटकर 96.96 के स्तर पर पहुंची।

घरेलू शेयर बाजार में आई भारी गिरावट और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद वित्तीय रुझानों का विश्लेषण।
भारतीय वित्तीय बाजार पर बुधवार को चौतरफा दबाव देखने को मिला, जिससे दलाल स्ट्रीट पर कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही बिकवाली का भारी दबाव बन गया। एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ खुले। शुरुआती कारोबार के दौरान ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स छह सौ अंक से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी पचास सूचकांक भी अपने महत्वपूर्ण स्तरों से काफी नीचे फिसल गया। इस बाजार संकट के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी हड़कंप मच गया, जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शून्य दशमलव तीन प्रतिशत की कमजोरी के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर यानी ऑल टाइम लो पर खुला, जिसने नीति निर्माताओं की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
दलाल स्ट्रीट पर सुबह के सत्र में बिकवाली इतनी तीव्र थी कि बीएसई सेंसेक्स के सभी तीस प्रमुख शेयर लाल निशान के साथ खुले और देखते ही देखते सूचकांक सात हजार चार सौ अंको की गिरावट के दायरे में आ गया। निफ्टी पचास इंडेक्स भी एक सौ छाछठ अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज करते हुए तेईस हजार चार सौ इक्यावन के स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी मार धातु, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर पड़ी, जहां निवेशकों ने तेजी से अपनी पूंजी निकाली। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, टाटा स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट देखी गई, जबकि मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भी एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी के साथ कारोबार करते पाए गए।
शेयर बाजार की इस बड़ी गिरावट के समानांतर विदेशी मुद्रा बाजार से भी बेहद निराशाजनक आंकड़े सामने आए। डॉलर के मुकाबले शुरुआती सत्र में ही घरेलू मुद्रा इकतालीस पैसे टूटकर छियानवे दशमलव छियानवे के ऐतिहासिक रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार की जा रही पूंजी की निकासी और वैश्विक स्तर पर मजबूत होते डॉलर इंडेक्स ने रुपये की स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। व्यापक बाजार सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में शून्य दशमलव तिरासी प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में एक दशमलव शून्य नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंदी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं था बल्कि छोटी और मध्यम श्रेणी की कंपनियों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।
इस बड़े वित्तीय संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए नए घटनाक्रमों को मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर दी गई कड़ी चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसके तहत यह कहा गया है कि यदि शीघ्र ही कोई समझौता नहीं हुआ तो बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि निकट भविष्य में वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव काफी बढ़ सकता है। वैश्विक महंगाई बढ़ने की इसी आशंका ने भारतीय बाजार सहित सभी उभरते हुए बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की तरफ रुख करने के लिए मजबूर किया है।
बाजार के विभिन्न क्षेत्रों में केवल निफ्टी फार्मा इंडेक्स ही ऐसा रहा जिसने इस विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ सहारा देने का प्रयास किया, जबकि निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी केमिकल जैसे क्षेत्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं समाप्त नहीं होतीं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक घरेलू बाजार और रुपये पर यह दबाव जारी रहने की संभावना है। बैंकिंग नियमों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत बाजार की इस उथल-पुथल पर तकनीकी निगरानी रखी जा रही है, ताकि खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
