नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण आज वैश्विक वित्तीय बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है। घरेलू स्तर पर कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक सेंसेक्स करीब 800 अंक तक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी इंडेक्स भी 250 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। इस चौतरफा बिकवाली के कारण शुरुआती कारोबार में ही भारतीय निवेशकों को करीब 5 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर सुबह 9:20 बजे सेंसेक्स 784.77 अंक अथवा 1.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज करते हुए 73,458.57 अंक के स्तर पर आ गया। ठीक इसी समय निफ्टी 50 इंडेक्स भी 234.80 अंक या 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,131.90 अंक पर कारोबार कर रहा था। इस बाजार संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स के शीर्ष 30 प्रमुख शेयरों में से 28 शेयर लाल निशान पर खुले। विमानन कंपनी इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा 1.98 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टीसीएस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और लार्सन एंड टुब्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भारी बिकवाली के दबाव में बिखर गए। शुरुआती सत्र में केवल टेक महिंद्रा और सन फार्मा जैसी चुनिंदा कंपनियां ही बढ़त बनाने में सफल रहीं।

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर इस संकट का प्रभाव और भी व्यापक रूप में सामने आया है। एशियाई बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में 9 प्रतिशत से अधिक की ऐतिहासिक ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जिसके बाद बाजार नियामकों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए करीब 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इसी क्रम में जापान का निक्केई इंडेक्स 5 प्रतिशत, हॉन्ग कॉन्ग का हेंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। भारतीय ब्रॉडर मार्केट में भी इसका सीधा असर पड़ा, जहां निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांकों में क्रमश: 1.51 प्रतिशत और 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स के लिहाज से निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि रक्षात्मक समझे जाने वाले फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में कुछ मजबूती देखी गई।

वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाजारों में इस ऐतिहासिक गिरावट की मुख्य वजह ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए हालिया मिसाइल हमले हैं, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही शांति वार्ताओं को खटाई में डाल दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड 3.37 प्रतिशत की उछाल के साथ 96.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, वहीं भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी बढ़कर 100.1 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुकी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति के जोखिम को बढ़ाती हैं, जिसके कारण आने वाले समय में बाजार में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की पूरी आशंका है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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