भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का कारोबारी सत्र निराशाजनक रहा, जहां पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के उत्साह पर पानी फेर दिया। दलाल स्ट्रीट पर सुबह से ही बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक लुढ़क गया। इस गिरावट ने न केवल बाजार की धारणा को प्रभावित किया, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी50 इंडेक्स को भी 24,500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे धकेल दिया। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारतीय निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी है।

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,771.48 के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया। निफ्टी में भी 125 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,451.55 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट विशेष रूप से तब चिंताजनक है जब पिछले सत्र में बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स लगभग 753 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ था। पिछले दिन की पूरी बढ़त आज शुरुआती एक घंटे के भीतर ही खत्म हो गई, जो बाजार की अस्थिरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

गिरावट का मुख्य नेतृत्व आईटी और बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों ने किया। एचसीएल टेक के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने पूरे आईटी इंडेक्स को दबाव में ला दिया। इसके साथ ही टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में भी 1 से 3 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। हालांकि, बाजार के इस लाल समंदर में भी कुछ शेयर हरे निशान में तैरने में सफल रहे। ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और सन फार्मा जैसे शेयरों में मामूली खरीदारी देखी गई, लेकिन यह व्यापक बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। कानूनी और विनियामक दृष्टिकोण से देखें तो सेबी और एक्सचेंज लगातार बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की असामान्य सट्टेबाजी को रोका जा सके। फिलहाल, बाजार की दिशा पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय समाचारों और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर निर्भर है। यदि वैश्विक तनाव में कमी नहीं आती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story