ईरान-अमेरिका तनाव से रसातल में पहुंचा सेंसेक्स,निवेशकों के डूबे लाखों करोड़!
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वार्ता बेनतीजा रहने से बाजार में मची भगदड़, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंचीं।

मुंबई स्थित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की इमारत और गिरावट दर्शाता रेड चार्ट,
मुंबई/नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी वार्ता के बेनतीजा रहने का गहरा प्रभाव आज भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और युद्ध की आशंकाओं ने निवेशकों के आत्मविश्वास को इस कदर झकझोरा कि शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया। दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही लाल निशान का बोलबाला रहा, जिससे निवेशकों को मिनटों में लाखों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इस गिरावट ने न केवल भारतीय बाजार बल्कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाजार से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कारोबार की शुरुआत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1,600 अंक से अधिक की गिरावट के साथ 75,937.16 अंक पर आ गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 469 अंकों की भारी गिरावट के साथ 23,580.95 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। प्री-ओपन सत्र के दौरान तो स्थिति और भी चिंताजनक थी, जब सेंसेक्स में 4,200 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। इस अफरा-तफरी के बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.28 के स्तर पर खुला, जो घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।
पश्चिम एशिया में वार्ता की विफलता का सबसे सीधा और घातक असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 8 प्रतिशत की तेजी के साथ 102.2 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ऊर्जा कीमतों में आया यह उबाल भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। बाजार में छाई इस चौतरफा गिरावट में सन फार्मा को छोड़कर सेंसेक्स के लगभग सभी प्रमुख शेयर धराशायी हो गए। इंडिगो, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी और बजाज फिनसर्व जैसे दिग्गजों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और पीएसयू सेक्टर के सूचकांक भी तीन प्रतिशत तक टूट गए, जिससे बाजार में हर तरफ घबराहट का माहौल बना हुआ है।
इस गिरावट के कानूनी और वित्तीय निहितार्थों को देखते हुए बाजार नियामक सेबी और वित्त मंत्रालय के अधिकारी वैश्विक घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और ईरान पर संभावित प्रतिबंधों की चर्चा ने बाजार को अस्थिर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में बाजार में और भी अधिक अस्थिरता देखी जा सकती है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट यह दर्शाती है कि जोखिम केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। आज का यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता का अभाव भारतीय निवेशकों की जमा पूंजी के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
