Share Market Hindi News : कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच परदे के पीछे से जारी अप्रत्यक्ष बातचीत की सकारात्मक खबरों ने वैश्विक बाजार समेत भारतीय शेयर बाजार के सेंटिमेंट को जबरदस्त बूस्ट दिया है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच दलाल स्ट्रीट पर इस हफ्ते तेजड़ियों ने जमकर अपनी ताकत दिखाई, जिससे घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ते नजर आए। पूरे सप्ताह के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार के दोनों बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी, शानदार साप्ताहिक बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे, जिसने निवेशकों के चेहरे पर रौनक ला दी है।

इस सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में चौतरफा लिवाली देखने को मिली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी अंतिम दिन 0.27 प्रतिशत की उछाल के साथ 23,719 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह के दौरान इसमें 0.32 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर, बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आखिरी सत्र में 231 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,415 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा, जिससे साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी आई। हालांकि, बाजार के इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बीच बाजार के दिग्गजों और विश्लेषकों का मानना है कि ऊपरी स्तरों पर आक्रामक खरीदारी की कमी यह दर्शाती है कि निवेशक अभी भी पूरी तरह से जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं और हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं।

क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो हालिया गिरावट के बाद बेहद आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध आईटी सेक्टर इस हफ्ते बाजार की तेजी का सबसे बड़ा सारथी बनकर उभरा। इसके अलावा रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर दिलचस्पी दिखाई। इसके विपरीत, थोक महंगाई दर के बढ़ते दबाव और कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर मंडराते संकट की चिंताओं ने एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को बैकफुट पर धकेल दिया, जिससे इन सेक्टरों में कमजोरी देखी गई। बड़े शेयरों के मुकाबले छोटे और मझोले शेयरों में इस बार ज्यादा चमक देखने को मिली, जहां निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.36 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ मुख्य सूचकांकों को पछाड़ते नजर आए।

वैश्विक मोर्चे से आ रहे संकेतकों ने घरेलू बॉन्ड मार्केट और रुपए को भी प्रभावित किया। कच्चे तेल के दामों में गिरावट से भारतीय रुपए को तो सहारा मिला, लेकिन बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने की आशंका से घरेलू बॉन्ड यील्ड में उछाल देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड साल 2007 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, जिसने दुनिया भर के बाजारों को चिंता में डाल दिया है। यह इस बात का साफ संकेत है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के दौर से गुजर सकती है, जिससे आने वाले समय में लिक्विडिटी का संकट गहरा सकता है।

बाजार के तकनीकी ढांचे को देखें तो विशेषज्ञों ने निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 के स्तर को एक बेहद मजबूत रेजिस्टेंस जोन माना है, जिसे पार करना बाजार के लिए बड़ी चुनौती होगी, जबकि नीचे की ओर 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया के रूप में काम करेगा। बैंक निफ्टी के लिए 54,200 का स्तर तत्काल बाधा बना हुआ है, जबकि 53,600 से 53,500 के दायरे में तगड़ा सपोर्ट मौजूद है। इन तकनीकी स्तरों के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली ने चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने इस सप्ताह बाजार से करीब 7,570 करोड़ रुपए की भारी-भरकम पूंजी निकाल ली।

भारतीय शेयर बाजार का अगला रुख अब पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। निवेशकों की निगाहें भारत के अप्रैल महीने के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी के आंकड़ों पर टिकी हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वास्तविक सेहत का पता चलेगा। इसके साथ ही, जून में होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा और अमेरिका के कोर पीसीई महंगाई आंकड़े दलाल स्ट्रीट की आगे की दिशा तय करेंगे। यदि अमेरिकी पीसीई आंकड़े उम्मीद से अधिक आते हैं, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हो सकती हैं, जिसका सीधा असर उभरते बाजारों में विदेशी फंडों के प्रवाह पर पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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