SEBI का मास्टरस्ट्रोक- अधिकारियों के लिए 'कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' कोड को मंजूरी, AIF निवेशकों और फंड्स को दी बड़ी राहत
SEBI बोर्ड ने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नए 'कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' कोड को मंजूरी दी है। साथ ही AIF के लिए एग्जिट नियमों में ढील और इनऑपरेटिव फंड्स की नई श्रेणी की घोषणा की। जानिए निवेशकों पर इसका क्या असर होगा।

SEBI's masterstroke
मुंबई:
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सोमवार को हुई अपनी अहम बोर्ड बैठक में बाजार की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कई दूरगामी फैसले लिए हैं। चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों (WTMs) और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक संशोधित 'कोड ऑफ कंडक्ट' (आचार संहिता) को मंजूरी दी गई है। यह कदम विशेष रूप से हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए उठाया गया है।
हितों के टकराव पर लगाम: सिन्हा समिति की सिफारिशें लागू
सेबी के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह सख्त नियम पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्युष सिन्हा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लाए गए हैं। मार्च 2025 में पदभार संभालने के बाद चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय का यह पहला बड़ा फैसला है।
इस पैनल का गठन पूर्व चेयरमैन माधवी पुरी बुच पर लगे उन आरोपों के बाद किया गया था, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी और अपने पति की आय और निवेश की पर्याप्त जानकारी साझा नहीं की थी। अब एक कानूनी रूप से लागू होने वाला तंत्र मौजूदा बिखरे हुए नियमों की जगह लेगा।
सरकार लेगी अंतिम फैसला
चेयरमैन पांडेय ने स्पष्ट किया कि बोर्ड के सदस्यों (Board Members) से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को अंतिम मंजूरी के लिए भारत सरकार के पास भेजा गया है। चूंकि सरकार ही सेबी बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति करती है और उनकी सेवा की शर्तें तय करती है, इसलिए उनके डिस्क्लोजर और नैतिकता की निगरानी के लिए एक अलग 'ओवरसाइट कमेटी' बनाने का अंतिम निर्णय सरकार ही लेगी।
AIF के लिए एग्जिट नियमों में लचीलापन
वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Funds - AIFs) उद्योग के लिए सेबी ने एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब AIFs को अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद बची हुई संपत्तियों (Residual Assets) और देनदारियों को संभालने के लिए अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी।
सेबी ने "इनऑपरेटिव फंड्स" (Inoperative Funds) की एक नई श्रेणी शुरू करने का निर्णय लिया है।
- समस्या: वर्तमान में, AIFs को अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने से पहले बैंक बैलेंस जीरो करना होता है और सभी विवाद निपटाने होते हैं। लेकिन टैक्स विवादों या अदालती मामलों के कारण कई फंड्स ऐसा नहीं कर पा रहे थे और उन्हें बिना किसी कामकाज के भी भारी रेगुलेटरी खर्च उठाना पड़ रहा था।
- समाधान: नई श्रेणी के तहत, ऐसे फंड्स को तब तक कम नियमों (Lighter Compliance) का पालन करना होगा जब तक वे औपचारिक रूप से अपना पंजीकरण रद्द नहीं कर देते। इससे फंड हाउसों का बोझ कम होगा।
FPI और InvITs के लिए अन्य प्रमुख निर्णय
बोर्ड ने बाजार की तरलता और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कुछ और तकनीकी बदलाव किए हैं:
- FPI के लिए नेट सेटलमेंट: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को कैश मार्केट में किए गए लेन-देन के लिए फंड के नेट सेटलमेंट की अनुमति दी गई है।
- InvITs और REITs में ढील: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के लिए निवेश मानदंडों को सरल बनाया गया है ताकि इस क्षेत्र में अधिक पूंजी आकर्षित की जा सके।
- सेबी कर्मचारी विनियम: 2001 के कर्मचारी सेवा नियमों में भी संशोधन किया जाएगा ताकि पूरे संगठन में हितों के टकराव के प्रबंधन का एक व्यापक ढांचा तैयार किया जा सके।
बाजार पर प्रभाव
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी के भीतर पारदर्शिता के इन नियमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अपने निवेश की जानकारी देना यह सुनिश्चित करेगा कि नियामक के निर्णय किसी व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित नहीं हैं। वहीं, AIF नियमों में बदलाव से फंड मैनेजरों को अपनी स्कीमों को बंद करने में आसानी होगी, जिसका सीधा लाभ उन निवेशकों को मिलेगा जिनका पैसा लंबे समय से कानूनी अड़चनों के कारण अटका हुआ था।
सेबी का यह नया अवतार न केवल खुद को अधिक जवाबदेह बना रहा है, बल्कि बाजार के विभिन्न भागीदारों (FPI, AIF) के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे रहा है। सरकार की अंतिम मुहर के बाद, भारतीय बाजार नियामक दुनिया के सबसे पारदर्शी नियामकों की श्रेणी में और मजबूती से खड़ा होगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
