भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अनलिस्टेड सार्वजनिक कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें निवेशकों को उन अनधिकृत वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स से दूर रहने को कहा गया है जो बिना अनुमति इस प्रकार की ट्रेडिंग सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं। SEBI ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्लेटफॉर्म न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही किसी भी प्रकार से विनियमित, जिससे निवेशकों के लिए गंभीर वित्तीय जोखिम उत्पन्न हो रहा है।

SEBI के अनुसार, हाल के समय में कई ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सामने आए हैं जो अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग जैसी सेवाएँ दे रहे हैं, विशेषकर उन सार्वजनिक कंपनियों के शेयरों में जो अभी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं हैं। इन गतिविधियों के चलते निवेशकों को गलत जानकारी, धोखाधड़ी और वित्तीय नुकसान जैसी संभावित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

नियामक संस्था ने यह भी दोहराया कि भारत में केवल वे ही संस्थाएँ शेयरों की वैध ट्रेडिंग सुविधा प्रदान कर सकती हैं जो मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के रूप में पंजीकृत हैं, जैसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)। इसके अतिरिक्त कोई भी प्लेटफॉर्म जो स्वयं को एक्सचेंज की तरह प्रस्तुत करता है, वह कानूनन वैध नहीं माना जाएगा और वह निवेशक सुरक्षा ढांचे के बाहर आता है।


SEBI ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्लेटफॉर्म भारतीय प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिनमें Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 और SEBI Act, 1992 शामिल हैं। इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल विनियमित संस्थाएँ ही शेयर बाजार की गतिविधियों का संचालन करें, जिससे पारदर्शिता बनी रहे, मूल्य निर्धारण सही हो और निवेशकों को सुरक्षा मिल सके। लेकिन इन अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इन सभी सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया जा रहा है।

अनलिस्टेड शेयरों की परिभाषा पर भी SEBI ने ध्यान दिलाया है। ऐसे शेयर वे होते हैं जो अभी NSE या BSE पर सूचीबद्ध नहीं हैं। इनमें प्री-IPO शेयर, भविष्य में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों के शेयर तथा निजी ओवर-द-काउंटर लेनदेन शामिल होते हैं। हालांकि, इन शेयरों की खरीद-बिक्री स्वयं में पूरी तरह अवैध नहीं है, लेकिन इन्हें सार्वजनिक एक्सचेंज जैसी संरचना के बिना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कराना अवैध और जोखिमपूर्ण माना जाता है।

SEBI ने इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई गंभीर जोखिमों को उजागर किया है। इनमें सबसे प्रमुख है निवेशक सुरक्षा का अभाव, क्योंकि ऐसे लेनदेन पर SEBI की शिकायत निवारण प्रणाली लागू नहीं होती। इसके अलावा धोखाधड़ी की संभावना भी अधिक रहती है, जिसमें नकली शेयर लिस्टिंग और गलत तरीके से मूल्य निर्धारण जैसी गतिविधियाँ शामिल हो सकती हैं। कीमतों में पारदर्शिता की कमी के कारण निवेशकों को गलत मूल्यांकन का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। शेयरों के ट्रांसफर और सेटलमेंट में भी अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे निवेशकों को कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं होता।

नियामक संस्था का मुख्य उद्देश्य ऐसे “फर्जी स्टॉक एक्सचेंज जैसे” प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाना है, जो बिना किसी पंजीकरण और निगरानी के एक अनौपचारिक बाजार की तरह कार्य कर रहे हैं। SEBI ने इसे निवेशकों के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा बताया है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश में प्री-IPO और अनलिस्टेड शेयरों में रिटेल निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है, साथ ही कई फिनटेक प्लेटफॉर्म भी इस प्रकार की सेवाएँ प्रदान करने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में SEBI की यह सख्त सलाह निवेशकों को सतर्क करने और बाजार में पारदर्शिता तथा सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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