बाजार नियामक सेबी ने अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों के खिलाफ नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले को पूरी तरह से निपटा दिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर संबंधित पक्षों के लेनदेन की जानकारी छिपाने और बिना सही सर्टिफिकेट वाली ऑडिट फर्मों से रिपोर्ट साइन कराने से जुड़ी थी। अडानी ग्रुप की इन कंपनियों ने कुल 1.5 करोड़ रुपये का सेटलमेंट शुल्क देकर सेबी के साथ इस मामले को सुलझा लिया है।

सेबी के निपटान आदेश के मुताबिक, इस मामले में ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी टोटल गैस लिमिटेड, एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड जो कि पहले अडानी विल्मर लिमिटेड थी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड जो कि पहले अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड थी, शामिल हैं।

सेबी की यह पड़ताल अडानी ग्रुप के खिलाफ जारी हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों और कॉरपोरेट संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच के तहत की गई थी। इसमें सूचीबद्धता नियमों और तत्कालीन सूचीबद्धता समझौते के संभावित उल्लंघनों की भी जांच की गई थी। आपको बता दें कि जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी।

मामले की निपटान शर्तों के तहत अडानी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये और अडानी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, अडानी टोटल गैस, एब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये का भुगतान किया है। निपटान आदेश के मुताबिक, यह पूरी कार्यवाही कुछ संबद्ध-पक्ष लेनदेन का खुलासा नहीं करने के आरोपों और वैध पीयर रिव्यू प्रमाणपत्र नहीं रखने वाली ऑडिट फर्मों द्वारा ऑडिट या सीमित समीक्षा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए जाने से जुड़ी हुई थी। इन सभी कंपनियों ने तय भुगतान करके सेबी के साथ इस मामले को बंद कर लिया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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