SBI Share Price Drop Friday: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े स्तंभ, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चौथी तिमाही के वित्तीय परिणामों ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों को गहरे संकट में डाल दिया है। शुक्रवार को बाजार खुलते ही बैंक के शेयरों में बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि देखते ही देखते इसकी कीमत 7.42 प्रतिशत तक गोता लगा गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर गिरकर 1,010.90 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया, जिसने न केवल व्यक्तिगत निवेशकों को बल्कि पूरे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सूचकांक को हिला कर रख दिया। एसबीआई की इस अप्रत्याशित गिरावट का असर इतना व्यापक था कि पीएसयू बैंक इंडेक्स सत्र के दौरान करीब 4 प्रतिशत तक नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया।

इस भारी गिरावट की मुख्य जड़ें बैंक के उन वित्तीय आंकड़ों में छिपी हैं, जो विश्लेषकों की उम्मीदों की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। वित्त वर्ष 2025 की मार्च तिमाही में एसबीआई का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ हालांकि 5.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 19,684 करोड़ रुपये रहा, लेकिन रॉयटर्स-एलएसईजी के अनुमानित 20,312 करोड़ रुपये के मुकाबले यह काफी कम साबित हुआ। मुनाफे में आई इस कमी के पीछे राजकोषीय परिचालन (Treasury Operations) से होने वाली आय में भारी गिरावट को मुख्य कारण माना जा रहा है। बॉन्ड यील्ड में हुई वृद्धि और विदेशी मुद्रा आर्बिट्रेज पर आरबीआई के कड़े रुख ने बैंक की ट्रेडिंग आय को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसके चलते खजाने से होने वाली आय पिछले वर्ष के 8,991 करोड़ रुपये से घटकर महज 1,259 करोड़ रुपये रह गई।

बैंक की कुल आय में भी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले साल के 1,43,876 करोड़ रुपये से घटकर 1,40,412 करोड़ रुपये रह गई। हालांकि, शुद्ध ब्याज आय में 4.1 प्रतिशत का सुधार देखा गया, लेकिन अन्य आय में आई करीब 29 प्रतिशत की कमी ने इस सकारात्मक पहलू को फीका कर दिया। परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार और कम प्रावधानों ने मुनाफे को कुछ हद तक सहारा जरूर दिया, लेकिन बाजार की धारणा को संभालने के लिए यह पर्याप्त नहीं था। वार्षिक आधार पर देखें तो बैंक का पूरे साल का शुद्ध लाभ 13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80,032 करोड़ रुपये रहा है, जो इसकी लंबी अवधि की मजबूती को दर्शाता है।

आधिकारिक घोषणाओं के बीच बैंक के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए 17.35 रुपये प्रति शेयर के लाभांश (Dividend) की सिफारिश की है, जिसके लिए 16 मई की रिकॉर्ड तिथि निर्धारित की गई है। इस लाभांश का भुगतान 4 जून तक किया जाएगा, जो निवेशकों के लिए एक छोटी राहत की खबर हो सकती है। विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि राजकोषीय दबाव और बदलती मौद्रिक नीतियों का असर अब देश के सबसे बड़े ऋणदाता के बही-खातों पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। बाजार का यह कंपन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में सरकारी बैंकों को अपनी आय के स्रोतों और जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना होगा।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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