क्या है भारतीय स्टेट बैंक (SBI)? बैंकिंग जगत का वह शिखर जिसने जीता करोड़ों भारतीयों का अटूट विश्वास।
1806 में बैंक ऑफ कलकत्ता से शुरू होकर 50 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचने वाले एसबीआई की स्थापना, विलय और वैश्विक पहचान का विस्तृत विवरण।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) आज केवल एक वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं और भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। मुंबई में मुख्यालय के साथ संचालित यह सार्वजनिक क्षेत्र का बहुराष्ट्रीय बैंक वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी ऋण और जमा के मामले में लगभग 25 प्रतिशत है। वैश्विक पटल पर अपनी धाक जमाते हुए यह बैंक विश्व के शीर्ष 50 बैंकों की सूची में शुमार है और फॉर्च्यून ग्लोबल 500 जैसी प्रतिष्ठित सूचियों में निरंतर स्थान बनाए हुए है। देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इसे 'डोमेस्टिक सिस्टेमैटिकली इंपॉर्टेंट बैंक' (D-SIB) की श्रेणी में रखा है, जिसका अर्थ है कि यह संस्थान भारतीय वित्तीय ढांचे के लिए इतना विशाल और अनिवार्य है कि इसका विफल होना असंभव माना जाता है।
एसबीआई की यह गौरवशाली यात्रा आज से लगभग दो सदियों पहले 1806 में 'बैंक ऑफ कलकत्ता' की स्थापना के साथ शुरू हुई थी, जो आगे चलकर बैंक ऑफ बंगाल बना। ब्रिटिश काल के दौरान बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास के साथ मिलकर यह प्रेसीडेंसी बैंकों का हिस्सा रहा, जिन्हें 1921 में समामेलित कर 'इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया' का स्वरूप दिया गया। स्वतंत्रता के पश्चात, ग्रामीण विकास और समावेशी बैंकिंग को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 1 जुलाई 1955 को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया और इंपीरियल बैंक का राष्ट्रीयकरण कर इसे 'भारतीय स्टेट बैंक' के रूप में पुनर्जन्म दिया। अपनी स्थापना के समय से ही इस बैंक ने न केवल शहरी बल्कि सुदूर ग्रामीण इलाकों तक बैंकिंग सेवाओं को पहुँचाने का बीड़ा उठाया, जिससे यह आम आदमी का बैंक बन गया।
विकास के इस सफर में बैंक ने समय-समय पर खुद को आधुनिक बनाया और विस्तार के नए आयाम स्थापित किए। वर्ष 1959 में आठ रियासती बैंकों को अपनी सहायक इकाइयों के रूप में जोड़ना हो या 2017 में अपने पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का खुद में विलय करना, एसबीआई ने हर कदम पर अपनी मजबूती सिद्ध की है। आज बैंक का नेटवर्क 22,500 से अधिक शाखाओं और 63,000 से अधिक एटीएम के साथ पूरे भारत में फैला हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बैंक की उपस्थिति अद्वितीय है, जहाँ 36 देशों में इसके 240 से अधिक कार्यालय मौजूद हैं। अपनी सहायक कंपनियों जैसे एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, एसबीआई कार्ड्स और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के माध्यम से यह एक पूर्ण वित्तीय समाधान प्रदाता के रूप में उभरा है।
तकनीकी क्रांति के दौर में भी एसबीआई ने अग्रणी भूमिका निभाई है। बैंक का डिजिटल प्लेटफॉर्म 'योनो' (YONO) आज 8.7 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ बैंकिंग का नया चेहरा बन चुका है। 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों के विशाल आधार को सेवा प्रदान करने के लिए बैंक ने लगभग 2.5 लाख समर्पित कर्मचारियों की एक फौज तैयार की है, जिसमें महिला शक्ति का योगदान भी सराहनीय है। वित्तीय समावेशन की दिशा में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करोड़ों खाते खोलकर बैंक ने सामाजिक सशक्तिकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। हाल के वर्षों में यस बैंक जैसे संकटग्रस्त संस्थानों को सहारा देकर एसबीआई ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के रक्षक के रूप में अपनी छवि और भी प्रगाढ़ की है।
आज भारतीय स्टेट बैंक केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। 2025 में 'ग्लोबल फाइनेंस' द्वारा विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपभोक्ता बैंक के रूप में सम्मानित होना इसकी उत्कृष्ट सेवाओं और वैश्विक मानक का प्रमाण है। 1971 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन द्वारा तैयार किया गया इसका नीला 'कीहोल' लोगो आज हर भारतीय के लिए सुरक्षा और निरंतरता का पर्याय है। अपनी ऐतिहासिक जड़ों से लेकर आधुनिक डिजिटल बैंकिंग तक, भारतीय स्टेट बैंक ने जिस तरह से करोड़ों लोगों के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी संपत्ति बनाया है, वह इसे बैंकिंग जगत का निर्विवाद शिखर बनाता है।

Pratahkal Bureau
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