डॉलर के सामने रुपया होगा और मजबूत; विदेशी मुद्रा भंडार में आई ऐतिहासिक बढ़त
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 14.167 बिलियन डॉलर का ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है। 16 जनवरी 2026 तक देश का कुल विदेशी खजाना 701.360 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया है। स्वर्ण भंडार और फॉरेन करेंसी एसेट्स में भारी वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जानें आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार रुपये की स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर इस वृद्धि का क्या होगा असर।

Forex Reserves India : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत सुखद और गौरवशाली खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में एक ही सप्ताह के भीतर 'तूफानी' उछाल दर्ज किया गया है। 16 जनवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में 14.167 बिलियन डॉलर की भारी वृद्धि हुई, जिसके बाद कुल भंडार अब 701.360 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुँच गया है।
खजाने में बढ़ोतरी के मुख्य आधार :
विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस ऐतिहासिक छलांग के पीछे मुख्य रूप से 'फॉरेन करेंसी एसेट्स' (FCA) और सोने (Gold) की कीमतों में आई तेजी जिम्मेदार रही है।
- फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): भंडार के इस सबसे बड़े घटक में 9.652 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्यू बढ़कर 560.518 बिलियन डॉलर हो गई। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल हैं।
- स्वर्ण भंडार (Gold Reserves): भारतीय तिजोरी में रखे सोने की चमक भी बढ़ी है। स्वर्ण भंडार की वैल्यू 4.623 बिलियन डॉलर की बढ़त के साथ अब 117.454 बिलियन डॉलर पर पहुँच गई है।
- SDR और IMF: हालांकि, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 35 मिलियन डॉलर और आईएमएफ में रिजर्व पोजीशन में 73 मिलियन डॉलर की मामूली कमी देखी गई है।
ऐतिहासिक संदर्भ: ऑल-टाइम हाई के करीब
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर (All-time High) के बेहद करीब पहुँच गया है। ज्ञात हो कि सितंबर 2024 में यह आंकड़ा 704.89 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर था। वर्तमान उछाल यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार में डॉलर की आवक निरंतर बनी हुई है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर अटूट है।
रुपये की मजबूती और व्यापारिक सुरक्षा :
विदेशी मुद्रा भंडार का यह स्तर केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि रुपये के लिए एक 'सुरक्षा कवच' है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो आरबीआई इसी भंडार का उपयोग कर विनिमय दर (Exchange Rate) को स्थिर रखता है। इसके अतिरिक्त, लबालब भरा खजाना विदेशों से व्यापार करना आसान बनाता है और देश की भुगतान संतुलन क्षमता को मजबूती प्रदान करता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
