Dollar के मुकाबले रुपया 95 के पार; Iran war ने बिगाड़ा खेल, जाने विस्तार से
ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा। RBI के हस्तक्षेप के बावजूद बाजार में भारी हलचल।

Indian Rupee Record Low 2026 : वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के भीषण परिणामों ने भारतीय मुद्रा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिरकर 95 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गया। ईरान युद्ध की लपटों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दोहरे प्रहार ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है, जिससे घरेलू मुद्रा में साल 2013 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय मुद्रा ने कारोबार के दौरान 95.31 का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ, जिसके बाद यह 94.85 के करीब बंद हुई। इस साल अब तक रुपये में लगभग 5% की गिरावट आ चुकी है, जो पिछले एक दशक का सबसे खराब प्रदर्शन है। इस संकट की मुख्य जड़ 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ वह संघर्ष है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान के साथ युद्ध छिड़ गया। युद्ध के चलते 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, के लिए यह स्थिति चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ाने वाली और मुद्रा पर दबाव डालने वाली साबित हो रही है।
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— Congress (@INCIndia) March 28, 2026
बाजार में मचे इस कोहराम के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 9.6 अरब डॉलर की निकासी की है। डॉलर की भारी मांग और रुपये की गिरती साख को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कमान संभाली है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने बाजार में हस्तक्षेप करते हुए लगभग 26 से 30 अरब डॉलर की बिक्री की है ताकि रुपये की गिरावट की गति को नियंत्रित किया जा सके। वहीं, आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए सरकार ने ईंधन पर लगने वाले शुल्कों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं, ताकि तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े।
आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपया आने वाले हफ्तों में 96 से 98 के स्तर तक गिर सकता है। वर्तमान संकट यह स्पष्ट करता है कि वैश्विक युद्ध न केवल सीमाओं पर लड़ा जा रहा है, बल्कि इसकी तपिश भारत जैसे उभरते बाजारों की मुद्राओं और आम आदमी की जेब तक भी पहुँच रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
