2027 तक स्थिर रहेगी रेपो रेट; भारतीय अर्थव्यवस्था के 'गोल्डन एरा' का नया आगाज
डीबीएस बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2027 तक दुनिया की सबसे तेज प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट में 2026-27 के दौरान रेपो रेट के 5.25% पर स्थिर रहने और जीडीपी विकास दर 6.5% के करीब रहने का अनुमान जताया गया है। वैश्विक बॉन्ड बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित फैसलों पर विस्तृत आर्थिक विश्लेषण।

GDP Growth in India : वैश्विक अनिश्चितताओं और विकसित देशों के बाजारों में जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था एक अभेद्य दुर्ग की तरह मजबूती से खड़ी है। मंगलवार को जारी डीबीएस बैंक (DBS Bank) की ताजा रिपोर्ट ने भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर एक अत्यंत सकारात्मक चित्र प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत न केवल आगामी दो वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा, बल्कि देश में मौद्रिक स्थिरता का एक नया युग भी शुरू होने वाला है।
जीडीपी और महंगाई: संतुलन की ओर कदम
डीबीएस बैंक का अनुमान है कि भारत की विकास दर स्थिर और टिकाऊ बनी रहेगी। यह निरंतरता उन वैश्विक निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है जो स्थिरता की तलाश में हैं।
विकास दर का अनुमान: देश की जीडीपी ग्रोथ वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत और 2027 में 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना है।
महंगाई का ग्राफ: खुदरा महंगाई (CPI), जो 2025 में 2.2 प्रतिशत के निचले स्तर पर थी, उसके 2027 तक धीरे-धीरे 4.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह वृद्धि कीमतों के 'सामान्य स्तर' पर लौटने का संकेत है, न कि किसी अनियंत्रित महंगाई का।
रेपो रेट और बॉन्ड मार्केट: कर्ज लेने वालों के लिए खुशखबरी
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतिगत दरों से संबंधित है। डीबीएस बैंक के अनुसार, आरबीआई 2026 और 2027 के दौरान रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है।
स्थिर ईएमआई (EMI): ब्याज दरों में स्थिरता का सीधा अर्थ है कि होम लोन और कार लोन लेने वाले उपभोक्ताओं पर किस्तों का अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट: भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी कमी आने की उम्मीद है, जो 2027 के अंत तक 6.40 प्रतिशत तक गिर सकती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में तरलता बनी रहेगी।
वैश्विक परिदृश्य और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भूमिका :
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ट्रंप प्रशासन और फेडरल रिजर्व के बीच के समीकरणों पर भी रिपोर्ट ने रोशनी डाली है। 27-28 जनवरी की आगामी एफओएमसी (FOMC) बैठक में अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने की संभावना है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजनीतिक नहीं, बल्कि महंगाई के जोखिमों का आकलन करने के लिए लिया गया एक तकनीकी कदम होगा। विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड के दशकों पुराने रिकॉर्ड टूटने के बावजूद, डीबीएस ने इसे किसी आर्थिक संकट के बजाय 'मार्केट करेक्शन' करार दिया है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
