आगामी 7 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के फैसलों की घोषणा होने वाली है, जिससे पहले देश की बड़ी कंपनियों में बॉन्ड के जरिए बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की जबरदस्त होड़ मच गई है । वैश्विक स्तर पर अमेरिका और जापान के सेंट्रल बैंकों द्वारा महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आरबीआई भी रेपो रेट में 25 बेसिस अंक की बढ़ोतरी कर सकता है|

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) अगले हफ्ते 10 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड के जरिए 7.85 से 7.90 प्रतिशत कूपन रेट पर 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है । बैंकरों का कहना है कि कंपनी 7 अक्टूबर को आरबीआई के मॉनिटरी पॉलिसी के फैसले से ठीक पहले अपनी इस कर्ज जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करना चाहती है। इससे पहले रिलायंस ने दो हफ्ते पहले भी 5 साल के बॉन्ड बेचकर 120 अरब रुपये जुटाए थे । घरेलू बॉन्ड यील्ड कम होने के कारण इस रास्ते से फंड जुटाना अमेरिकी डॉलर में कर्ज लेने की तुलना में अधिक किफायती साबित हो रहा है

इसी कड़ी में, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स सहित कई अन्य बड़ी कंपनियों ने भी एक ही दिन में कुल मिलाकर 14,500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई है । रिपोर्ट के अनुसार, अकेले अडानी एयरपोर्ट ने 3 साल के लिए 8.96% की दर से 1,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं । इसके अलावा, स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) ने 3 साल के लिए 6,000 करोड़ रुपये तक जुटाए, आदित्य बिड़ला कैपिटल ने भी इसी अवधि के लिए 1,000 करोड़ रुपये जुटाए, और जेएसडब्ल्यू (JSW) एनर्जी ने 7 साल की अवधि के लिए 500 करोड़ रुपये जुटाए हैं|

कंपनियों के बीच फंड जुटाने की यह होड़ मुख्य रूप से बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी (लिक्विडिटी) के कारण है, जिसका लाभ कंपनियां आरबीआई के आगामी फैसलों से पहले उठाना चाहती हैं । भारतीय बैंकों ने आरबीआई की स्पेशल स्वैप सुविधा के तहत रिकॉर्ड रकम जुटाई है, और बैंक इस लिक्विडिटी का उपयोग कॉर्पोरेट लोन, प्रोजेक्ट फाइनेंस, बॉन्ड और वर्किंग कैपिटल जैसी संपत्तियों के लिए कर रहे हैं |

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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