अब नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी; RBI के नए नियम से खाताधारकों पर लगाया बैन
भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को गुमराह करने से रोकने के लिए नया अमेंडमेंट निर्देश जारी कर कमर्शियल बैंकों के लिए कड़े नियम तय किए हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मुंबई स्थित मुख्यालय जहां से कमर्शियल बैंकों द्वारा ग्राहकों को गुमराह करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
RBI guidelines for DSA DMA agents : देश के बैंकिंग इतिहास में आम उपभोक्ताओं की गाढ़ी कमाई को बैंकों की शातिर कूटनीतियों और छिपी हुई शर्तों से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अब तक का सबसे सख्त वित्तीय कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देश के तमाम कमर्शियल बैंकों की उस मनमानी और तानाशाही को पूरी तरह से बैन कर दिया है, जिसके तहत वे अक्सर सीधे-साधे ग्राहकों को गुमराह कर वित्तीय नुकसान पहुंचाते थे। आए दिन मिलने वाली गंभीर शिकायतों और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन स्तर पर होने वाली धोखाधड़ी का संज्ञान लेते हुए आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब ग्राहकों की मर्जी के बिना उन पर कोई भी अवांछित वित्तीय स्कीम या इंश्योरेंस पॉलिसी थोपी नहीं जा सकती। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यदि कोई भी बैंक ग्राहकों को वित्तीय जाल में फंसाता पाया गया, तो केंद्रीय बैंक उसके खिलाफ ऐसी दंडात्मक कार्रवाई करेगा जिससे पूरे बैंकिंग सिस्टम में खलबली मच जाएगी।
इस कड़े प्रशासनिक और कानूनी सुधार की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने १५ जून २०२६ को आधिकारिक तौर पर 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक) का दूसरा अमेंडमेंट निर्देश २०२६' जारी कर दिया है। यह नया वैधानिक निर्देश देश के सभी कमर्शियल बैंकों पर समान रूप से लागू होगा, जिसमें स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और लोकल एरिया बैंक शामिल हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने इन संस्थाओं के स्वरूप को देखते हुए अलग-अलग गाइडलाइंस भी तय की हैं। बैंकिंग व्यवस्था में इस युगांतरकारी बदलाव को पूरी तरह से लागू करने और बैंकों को अपने मौजूदा तकनीकी व प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने के लिए करीब साढ़े छह महीने का पर्याप्त समय दिया गया है, जिसके बाद १ जनवरी २०२७ से ये तमाम कड़े नियम देश भर में पूरी तरह से बाध्यकारी हो जाएंगे।
आरबीआई द्वारा जारी किए गए इन नए नीतिगत दिशा-निर्देशों के तहत अब बैंकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सभी एम्पैनल्ड डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) और डायरेक्ट मार्केटिंग एजेंट (DMA) की पूरी और अपडेटेड लिस्ट अनिवार्य रूप से पब्लिश करनी होगी। इस सूची में होने वाले किसी भी तरह के फेरबदल को सात दिनों के भीतर पोर्टल पर अपडेट करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इसके अलावा, अब बैंक की हर एक शाखा को अपने नियमित स्टाफ, बाहरी एजेंटों और थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट रिप्रेजेंटेटिव्स के बीच का अंतर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा; इसके लिए कर्मचारियों की ड्रेस कोड या उनके पहचान पत्र (ID) में साफ अंतर दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। बैंकों को अपने सभी डीएसए और डीएमए से यह लिखित अंडरटेकिंग लेनी होगी कि वे और उनके सब-एजेंट बैंक के आधिकारिक 'कोड ऑफ कंडक्ट' का शत-प्रतिशत पालन करेंगे, जिसे आम जनता की समीक्षा के लिए बैंक की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।
ग्राहकों के मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न को रोकने के लिए आरबीआई ने रिकवरी और मार्केटिंग एजेंटों के समय को भी कड़ाई से सीमित कर दिया है। नए वैधानिक नियम के अनुसार, कोई भी एजेंट ग्राहकों से केवल सुबह ९ बजे से लेकर शाम ७ बजे के बीच ही संपर्क स्थापित कर सकता है। इसके साथ ही, बिना ग्राहक की लिखित या डिजिटल मंजूरी के कोई भी एजेंट उनके घर या कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी थर्ड-पार्टी कर्मी खुद को बैंक का आधिकारिक स्टाफ होने का झूठा दावा नहीं कर सकता और न ही बैंक की तरफ से ग्राहक को कोई फर्जी वादा कर सकता है। अक्सर देखा जाता था कि जब कोई सामान्य नागरिक बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य पूछताछ के लिए जाता था, तो बैंक कर्मी उसे गुमराह करके कोई महंगी इंश्योरेंस पॉलिसी थमा देते थे, या ऑनलाइन बैंकिंग के दौरान बिना सहमति के धोखे से कोई प्रोडक्ट एक्टिवेट कर देते थे; अब इन सभी हरकतों पर पूरी तरह से परमानेंट बैन लगा दिया गया है।
रिजर्व बैंक का यह ऐतिहासिक चाबुक देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस सख्त नीतिगत हस्तक्षेप से न केवल बैंकों की मनमानी नफेखोरी और एकाधिकारशाही को करारा झटका लगा है, बल्कि देश के करोड़ों खाताधारकों के भीतर डिजिटल बैंकिंग को लेकर एक नया विश्वास पैदा होगा। आने वाले समय में यह निर्देश बैंकों को अपनी मार्केटिंग रणनीतियों को सुधारने के लिए मजबूर करेगा और भारतीय वित्तीय बाजार में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा का एक ऐसा दूरगामी उदाहरण स्थापित करेगा, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
