भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक आज से शुरू हो चुकी है, जिसके फैसलों की औपचारिक घोषणा 7 अक्टूबर को की जाएगी। अर्थशास्त्रियों के एक पोल के अनुसार, इस बार की पॉलिसी में मुख्य ब्याज दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50% किया जा सकता है। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और खराब मॉनसून से अनाज के उत्पादन पर पड़े असर के कारण महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है। इन तमाम आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि आरबीआई फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी का कदम उठा सकता है।

सर्वे में शामिल 21 अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों में से 20 का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार नीतिगत दरों में इजाफा करेगा, जबकि केवल एक ने दरों में कोई बदलाव न होने की उम्मीद जताई है। इससे पहले पिछले साल दिसंबर में आरबीआई ने रेपो रेट को 25 बीपीएस घटाकर 5.25% कर दिया था। हालांकि, अब कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा भी हाल ही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने और आगे भी इसे जारी रखने के संकेत दिए जाने के बाद वैश्विक बाजारों में बदलाव देखने को मिल रहा है। गोल्डमैन सैश की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक घटनाक्रमों को देखते हुए दरों में बढ़ोतरी का दौर समय से पहले शुरू हो सकता है और यह प्रक्रिया लंबी चल सकती है।

आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट को 25 बीपीएस बढ़ाकर 6.50% किया था। भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के मुख्य कारण रहे हैं, जिसके चलते अमेरिका और जापान जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को भी अपनी दरें बढ़ानी पड़ी हैं। अर्थशास्त्रियों को आशंका है कि तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई आरबीआई के निर्धारित 6% के टॉलरेंस लेवल से ऊपर जा सकती है। केनरा बैंक के चीफ इकनॉमिस्ट माधवन कुट्टी ने बताया कि खराब मॉनसून और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते दूसरी और तीसरी तिमाही के महंगाई के आंकड़े अनुमान से ज्यादा रह सकते हैं और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण यह पीक पर भी पहुंच सकती है।

दूसरी ओर, बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने नीतिगत दरों पर अलग राय रखते हुए कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान ब्याज दरें बढ़ाने से खर्चों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस पूरी साइकिल के दौरान रेपो रेट बढ़कर 6% तक पहुंच सकता है, जिससे आने वाले समय में आम जनता के लिए लोन की किस्तें यानी EMI और महंगी होने की पूरी संभावना है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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