भारतीय वित्तीय बाजारों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अब तक उल्लेखनीय मजबूती और स्थिरता का परिचय दिया है, लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक चुनौती अब आगे आने वाली है। एम्स्टर्डम में आयोजित 25वें FIMMDA-PDAI वार्षिक सम्मेलन में अपने मुख्य संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि अब देश को बाजारों की गहराई, तरलता और सहभागिता को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि दीर्घकालिक विकास को टिकाऊ बनाया जा सके।

‘इंडियन फाइनेंशियल मार्केट्स – रेजिलिएंस एंड रिसर्जेंस’ विषय पर बोलते हुए गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच औसतन 8.2 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई है, जबकि 2025-26 के लिए 7.6 प्रतिशत और 2026-27 के लिए 6.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) वित्त वर्ष 2027 में लगभग 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राजकोषीय अनुशासन में सुधार के साथ-साथ कर संग्रह में वृद्धि और खर्च की गुणवत्ता में सुधार ने आर्थिक संतुलन को मजबूत किया है।

वित्तीय प्रणाली की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग और NBFC क्षेत्र की बैलेंस शीट में सुधार हुआ है, जबकि कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार के विस्तार ने बैंक ऋण पर निर्भरता कम की है। विदेशी मुद्रा भंडार अब लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करने में सक्षम है, और 2025-26 में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगभग 90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी बताया कि RBI ने वित्तीय बाजारों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें लिक्विडिटी प्रबंधन ढांचे को अधिक गतिशील बनाना, वित्त वर्ष 2027 से राज्य विकास ऋण (SDL) के लिए बेंचमार्क इश्यू रणनीति का विस्तार, कॉर्पोरेट बॉन्ड पर टोटल रिटर्न स्वैप और क्रेडिट रिस्क प्रबंधन के लिए बॉन्ड इंडेक्स पर डेरिवेटिव्स की शुरुआत शामिल है। इसके अलावा सरकारी प्रतिभूतियों पर फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स भी पेश किए गए हैं, जिनका उपयोग अब बीमा कंपनियों जैसे दीर्घकालिक निवेशक तेजी से कर रहे हैं।

गवर्नर ने स्पष्ट किया कि भारतीय वित्तीय बाजारों के सामने अब असली चुनौती केवल स्थिरता बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक गहराई देना है। यह चुनौती मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियों के बीच पूंजी प्रवाह को बनाए रखने, बॉन्ड और मुद्रा बाजारों को मजबूत करने तथा वित्तीय ढांचे को अधिक जटिल और बड़े पैमाने पर संचालन योग्य बनाने से जुड़ी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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