राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला; जाने क्यों मोदी सरकार की 'ग्रेट निकोबार विकास परियोजना' को बताया करोड़ों का घोटाला
प्रतिपक्ष के नेता ने ₹72,000 करोड़ की योजना को पर्यावरणीय और जनजातीय हितों के विरुद्ध बताते हुए संसद के आगामी सत्र में चर्चा की मांग की है।

ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के नक्शे के साथ राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोलाज
Rahul Gandhi Great Nicobar visit : भारत के सुदूर दक्षिण में स्थित शांत और जैव-विविधता से संपन्न ग्रेट निकोबार द्वीप समूह इस समय एक बड़े राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद का केंद्र बन गया है। प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 26 से 29 अप्रैल, 2026 तक द्वीपों के अपने रणनीतिक दौरे के दौरान केंद्र सरकार की ₹72,000 करोड़ की 'समग्र विकास योजना' (Holistic Development Plan) पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एक बड़ा 'घोटाला' करार देते हुए आगाह किया कि यह कदम न केवल पारिस्थितिक तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचाएगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के अस्तित्व को भी संकट में डाल देगा।
इस विवाद की जड़ में सरकार की वह वृहद योजना है जिसके तहत द्वीप के लगभग 18 प्रतिशत हिस्से पर एक विशाल टाउनशिप, एक अंतर्राष्ट्रीय ट्रांशिपमेंट पोर्ट, एक दोहरे उपयोग वाला हवाई अड्डा और बिजली संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करते हुए नौसैनिक निगरानी क्षमता को बढ़ाना है। हालांकि, राहुल गांधी ने इस विकास के पीछे की भारी कीमत को रेखांकित करते हुए कहा कि 160 वर्ग किलोमीटर के वर्षावनों में लाखों पेड़ों की कटाई और यूनेस्को (UNESCO) बायोस्फीयर रिजर्व का विनाश मानवता और प्रकृति के विरुद्ध एक अपराध के समान है।
I travelled through Great Nicobar today.These are the most extraordinary forests I have ever seen in my life. Trees older than memory. Forests that took generations to grow.The people on this island are equally beautiful - both the adivasi communities and the settlers - but… pic.twitter.com/vYdBWdYfIJ— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 29, 2026
परियोजना का मानवीय पहलू भी उतना ही संवेदनशील है, क्योंकि इससे आदिम जनजातीय समुदायों, विशेष रूप से शोम्पेन और निकोबारी लोगों के विस्थापन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक हितों के नाम पर उन लोगों के अधिकारों की बलि नहीं दी जा सकती जो सदियों से इन जंगलों के संरक्षक रहे हैं। जहाँ एक ओर सरकारी पक्ष इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस बुनियादी ढांचे को 'भू-राजनीतिक आवश्यकता' बता रहा है, वहीं विपक्षी नेता ने इसे स्थानीय संसाधनों की लूट और एक बड़े घोटाले के रूप में परिभाषित किया है। सरकार ने इन चिंताओं के जवाब में बहाली वृक्षारोपण (Restoration Planting) और निगरानी जैसे उपशमन उपायों का वादा किया है, लेकिन आलोचकों के अनुसार ये उपाय विनाश की तुलना में अपर्याप्त हैं।
ग्रेट निकोबार में-⦿ 1 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे⦿ आदिवासियों का घर छीना जाएगा⦿ हजारों एकड़ जंगल बर्बाद किए जाएंगेकारण जान लीजिए 👇 pic.twitter.com/W54SKB3h9o— Congress (@INCIndia) April 30, 2026
दौरे के समापन पर राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिए कि ग्रेट निकोबार का यह मुद्दा केवल द्वीपों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे इसे संसद के आगामी सत्र में पूरी ताकत से उठाएंगे। यह घटनाक्रम न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच के संतुलन पर एक नई बहस छेड़ता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि भारत के विकास का मॉडल समावेशी और प्रकृति-अनुकूल होगा या केवल कंक्रीट के ढांचे तक सीमित रह जाएगा। ग्रेट निकोबार का भविष्य अब नीतिगत निर्णयों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कसौटी पर टिका है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
