Delivery Rider Safety India : क्विक-कॉमर्स के नाम पर सड़कों पर छिड़ी '10-मिनट डिलीवरी' की जानलेवा प्रतिस्पर्धा पर आखिरकार विराम लग गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के कड़े संघर्ष और निरंतर दबाव के बाद केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कंपनियों को अब अपनी ब्रांडिंग और विज्ञापनों से '10-मिनट' का समय सीमा वाला दावा तत्काल प्रभाव से हटाना होगा। इस फैसले को मानवीय गरिमा और सड़क सुरक्षा की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। सांसद चड्ढा ने इसे 'सत्यमेव जयते' करार देते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।

संसद से सड़क तक संघर्ष: जब सांसद बने डिलीवरी पार्टनर

राघव चड्ढा इस मुद्दे को लेकर पिछले लंबे समय से मुखर रहे हैं। उनकी इस मुहिम ने तब वैश्विक सुर्खियां बटोरीं जब उन्होंने स्वयं एक दिन डिलीवरी पार्टनर के रूप में सड़कों पर बिताया ताकि गिग वर्कर्स (Gig Workers) की जमीनी हकीकत को समझा जा सके।

  • मानसिक और शारीरिक दबाव: चड्ढा का तर्क था कि राइडर की टी-शर्ट, बैग और ग्राहक की मोबाइल स्क्रीन पर चलता '10 मिनट' का टाइमर राइडर्स पर अवास्तविक दबाव बनाता है।
  • जान का जोखिम: इस कम समय की ब्रांडिंग के कारण राइडर्स यातायात नियमों को तोड़ने और तेज गति से वाहन चलाने को मजबूर थे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा था।

सरकारी हस्तक्षेप और कंपनियों का सरेंडर :

विवाद के बढ़ते स्तर को देखते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने क्विक-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों—ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।

  • कड़ा निर्देश: सरकार ने कंपनियों को सख्त हिदायत दी कि वे '10-मिनट' की समय सीमा वाली मार्केटिंग रणनीति को तत्काल बंद करें क्योंकि यह श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा का उल्लंघन है।
  • तत्काल अनुपालन: बैठक के बाद कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया कि वे अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इस दावे को हटा लेंगे। ब्लिंकिट ने तत्काल प्रभाव से '10-मिनट डिलीवरी' के क्लेम को अपने प्लेटफॉर्म से हटाकर इसकी शुरुआत कर दी है।

'इंसानी जिंदगी और गरिमा की जीत' :

राघव चड्ढा ने इस जीत पर खुशी जाहिर करते हुए गिग वर्कर्स को संदेश दिया कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। उन्होंने उन सभी नागरिकों का धन्यवाद किया जिन्होंने मुनाफे की अंधी दौड़ के खिलाफ मानवीय मूल्यों का समर्थन किया।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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