क्या है पंजाब नेशनल बैंक? स्वदेशी पूंजी से वैश्विक पहचान तक का गौरवशाली सफर
लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित पीएनबी की विकास यात्रा, विलय के बाद इसकी वर्तमान स्थिति और बैंकिंग क्षेत्र में इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण।

नई दिल्ली स्थित पंजाब नेशनल बैंक का प्रधान कार्यालय, जो मार्च 2025 तक 10,000 से अधिक शाखाओं के नेटवर्क का संचालन केंद्र है।
भारतीय वित्तीय परिदृश्य में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) महज एक बैंक नहीं, बल्कि राष्ट्र के आर्थिक स्वावलंबन और स्वदेशी संकल्प का एक जीवंत प्रतीक है। आज नई दिल्ली में अपने मुख्यालय से संचालित होने वाला यह सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार 10,189 शाखाओं और 11,822 एटीएम के विशाल नेटवर्क के साथ देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। 1,02,746 से अधिक समर्पित कर्मचारियों की शक्ति और करोड़ों ग्राहकों के अटूट विश्वास के साथ, पीएनबी आज भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है। इसकी पहुंच केवल भारतीय सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यूनाइटेड किंगडम, हांगकांग, दुबई और काबुल जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में इसकी शाखाएं और सहयोगी बैंक भारत की वित्तीय साख को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान कर रहे हैं। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के ऐतिहासिक विलय के बाद पीएनबी ने ₹17.95 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया है।
इस विशाल बैंकिंग साम्राज्य की नींव 19 मई 1894 को अविभाजित भारत के लाहौर में रखी गई थी, जो इसे पूरी तरह से भारतीय पूंजी के साथ शुरू होने वाला देश का पहला स्वदेशी बैंक बनाता है। स्वदेशी आंदोलन की भावना से ओतप्रोत होकर लाला लाजपत राय, दयाल सिंह मजीठिया और लाला हरकिशन लाल जैसे दूरदर्शी महापुरुषों ने इसकी स्थापना की थी। इन संस्थापकों का साझा उद्देश्य एक ऐसा राष्ट्रीय बैंक बनाना था जो देश के आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे। बैंक की विश्वसनीयता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसी महान विभूतियों ने यहां अपने खाते संचालित किए। 12 अप्रैल 1895 को लाहौर में व्यवसाय शुरू करने के बाद, पीएनबी ने 1900 में भारत की वर्तमान भौगोलिक सीमाओं के भीतर अपनी पहली शाखा खोली और तब से यह निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।
स्वतंत्रता और विभाजन के दौर में पंजाब नेशनल बैंक को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बंटवारे के दौरान बैंक को पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित अपनी कुल शाखाओं का एक तिहाई हिस्सा और लगभग 40 प्रतिशत जमा राशि गंवानी पड़ी, लेकिन इसके नेतृत्व ने साहस नहीं खोया। विभाजन से पूर्व ही बैंक ने अपना मुख्यालय दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय ले लिया था, जिससे ग्राहकों की जमा पूंजी को सुरक्षित रखा जा सका। 19 जुलाई 1969 को भारत सरकार द्वारा बैंक का राष्ट्रीयकरण किया जाना इसके सफर का एक अहम मोड़ साबित हुआ, जिसके बाद इसने समाज के हर वर्ग तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाने का मिशन शुरू किया। इस यात्रा में पीएनबी ने भारत बैंक, हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक और न्यू बैंक ऑफ इंडिया जैसे कई संस्थानों का स्वयं में विलय कर अपनी शक्ति और भौगोलिक विस्तार को दोगुना किया।
आधुनिक बैंकिंग के युग में पीएनबी ने खुद को एक तकनीक-सक्षम वैश्विक वित्तीय संस्थान के रूप में स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंक ने भूटान में ड्रुक पीएनबी और नेपाल में एवरेस्ट बैंक के साथ रणनीतिक साझेदारी और निवेश के माध्यम से अपनी पैठ बनाई है। इसके अलावा कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इसकी उपस्थिति भारतीय बैंकिंग के विस्तार को दर्शाती है। बैंक केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत 'पीएनबी लाडली' जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण शिक्षा और पीएनबी हॉकी अकादमी के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को निखारने का कार्य भी कर रहा है। वित्तीय उतार-चढ़ाव और 2018 जैसी चुनौतियों के बावजूद, बैंक ने अपनी पारदर्शी कार्यप्रणाली और सशक्त गवर्नेंस के दम पर बाजार में अपनी साख को पुनः स्थापित किया है।
आज पंजाब नेशनल बैंक बीएसई और एनएसई दोनों पर सूचीबद्ध है और निफ्टी 50 इंडेक्स का एक प्रमुख घटक है, जिसमें भारत सरकार की 73 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी इसकी संप्रभुता और स्थिरता की गारंटी देती है। डिजिटल बैंकिंग, पीएनबी मेटलाइफ के माध्यम से बीमा सेवाएं और पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस के जरिए गृह ऋण जैसी विविध सेवाओं के साथ यह बैंक एक "वन-स्टॉप फाइनेंशियल डेस्टिनेशन" बन चुका है। अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए पीएनबी आज भी उन्हीं आदर्शों पर चल रहा है, जिनकी नींव लाला लाजपत राय ने रखी थी। यह बैंक न केवल भारत के गौरवशाली अतीत का गवाह है, बल्कि एक विकसित भारत के निर्माण में वित्तीय सेतु के रूप में अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह कर रहा है।

Pratahkal Bureau
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