PMLA case against Sanjeev Arora Punjab : पंजाब की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली, लुधियाना और गुरुग्राम सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। सेक्टर-2 स्थित मंत्री के सरकारी आवास पर तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

इस पूरे प्रकरण की जड़ें मोबाइल फोन के व्यापार से जुड़े फर्जी जीएसटी बिलों और हवाला ऑपरेशन्स से जुड़ी बताई जा रही हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, संजीव अरोड़ा की कंपनी पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनवॉइस तैयार किए ताकि अवैध धन को वैध रूप दिया जा सके। प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यह शिकंजा कसा है। गौरतलब है कि संजीव अरोड़ा के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले साल 2024 में जमीन के दुरुपयोग और अप्रैल 2026 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के मामलों में भी उनसे पूछताछ की जा चुकी है।

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राज्य में राजनीतिक युद्ध छिड़ गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी ने इसे भारतीय जनता पार्टी की "राजनीतिक प्रतिशोध" की राजनीति करार देते हुए दावा किया है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे विपक्षी नेताओं ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह गिरफ्तारी 'आप' के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार के गहरे संबंधों को उजागर करती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 100 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिलने की स्थिति में मंत्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वर्तमान में संजीव अरोड़ा ईडी की हिरासत में हैं और उनसे गहन पूछताछ जारी है। यह घटनाक्रम न केवल पंजाब सरकार की छवि पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राज्य की चुनावी बिसात को भी पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट में जांच एजेंसी किन दस्तावेजों को पेश करती है और इस सियासी तूफान का ऊंट किस करवट बैठता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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