थाली भी महंगी और सफर भी दुश्वार: क्या ईरान-अमेरिका की जंग की आग में झुलस जाएगा भारतीय मध्यम वर्ग का बजट?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल मजबूत, घरेलू तेल कंपनियों को रोजाना हो रहा भारी घाटा।

नई दिल्ली के एक ईंधन स्टेशन पर उपभोक्ता की कार के टैंक में पेट्रोल भरने के लिए नोजल का उपयोग करता पेट्रोल पंप कर्मी|
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे लगातार उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आज राहत और चिंता की मिली-जुली खबरें सामने आ रही हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक गतिरोध के कारण कच्चे तेल के दामों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, सार्वजनिक क्षेत्र की घरेलू तेल विपणन कंपनियों ने आज पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्यों में कोई नया बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के ठीक बाद कीमतों में की गई लगातार बढ़ोतरी के कारण आम जनता पहले से ही बढ़े हुए दामों का बोझ उठा रही है।
वैश्विक बाजार के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते मंगलवार को दोनों देशों के बीच तल्खी और अधिक बढ़ गई। इस रणनीतिक अस्थिरता का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ा है, जहां मानक ब्रेंट क्रूड के दाम में 0.76 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह सुबह के कारोबारी सत्र में 96.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह अमेरिकी बाजार का मानक डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 0.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.48 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। भारतीय दृष्टिकोण से एकमात्र सकारात्मक पहलू यह रहा कि इंडियन बास्केट क्रूड के मूल्य में 0.94 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है, जिससे इसकी कीमत कम होकर 96.60 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।
घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों का विश्लेषण करें तो मालूम होता है कि देश की तेल कंपनियों ने पिछले ग्यारह दिनों में चार बार कीमतों में भारी वृद्धि की है। विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद सबसे पहली बढ़ोतरी के तहत पेट्रोल की कीमतों में 3 रुपये और डीजल में 3.29 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इसके बाद अलग-अलग चरणों में क्रमशः 87 पैसे, 91 पैसे और अधिकतम 2.71 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई। इस क्रमिक मूल्य वृद्धि के परिणामस्वरूप देश के प्रमुख महानगरों में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर के आसपास बनी हुई हैं।
देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में ईंधन के दाम सबसे अधिक बने हुए हैं, जहां पेट्रोल का भाव 111.21 रुपये और डीजल का मूल्य 97.83 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके अलावा कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर स्थिर है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोएडा में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल का भाव 97.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। अन्य प्रमुख शहरों जैसे पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये और भोपाल में यह 114.57 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है। एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के महंगे होने और घरेलू स्तर पर आनुपातिक बढ़ोतरी न होने से सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और जेट फ्यूल की बिक्री पर करीब 750 करोड़ रुपये का भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में ईरान संकट के शुरू होने के बाद से कच्चा तेल वैश्विक स्तर पर लगभग 50 फीसदी तक महंगा हो चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
