पेट्रोल डीजल की कीमतें: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद घरेलू दामों में बदलाव नहीं
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड में गिरावट के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू कीमतों में नहीं की कोई कटौती।

ईंधन भराने के लिए पेट्रोल पंप पर तेल मशीन की नोजल पकड़कर खड़े कर्मचारी का एक दृश्य।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई नरमी के बावजूद देश के आम उपभोक्ताओं को फिलहाल महंगाई से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। भारतीय सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज देश के प्रमुख महानगरों और राज्यों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड के दामों में आई आंशिक गिरावट के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि घरेलू बाजार में वाहन ईंधन की दरों में कटौती की जाएगी, लेकिन तेल कंपनियों ने आज सुबह छह बजे जारी की गई मूल्य समीक्षा सूची में दामों को जस का तस बनाए रखा। यह स्थिरता ऐसे समय में आई है जब हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के तत्काल बाद से ही ईंधन की कीमतों में सिलसिलेवार ढंग से बढ़ोतरी की गई थी।
वैश्विक तेल बाजार के परिदृश्य पर नजर डालें तो अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का दाम शून्य दशमलव छह दो फीसदी की गिरावट के साथ तिरानवे दशमलव सात एक डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। इसी तरह अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत भी शून्य दशमलव चार नौ प्रतिशत कम होकर अट्ठासी दशमलव चार छह डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय गिरावट के बाद भी भारतीय बास्केट कच्चे तेल की लागत अभी भी एक सौ दो दशमलव एक शून्य डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर बनी हुई है। इसका मुख्य कारण हाल ही में भड़के ईरान युद्ध को माना जा रहा है, जिसके शुरू होने के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब पचास फीसदी का भारी उछाल आ चुका है।
घरेलू बाजार में पिछले ग्यारह दिनों का इतिहास आम नागरिकों के लिए काफी चिंताजनक रहा है। विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के ठीक बाद से तेल कंपनियों ने लगातार चार बार कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। इन ग्यारह दिनों के भीतर ही देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में सात रुपये पैंतीस पैसे और डीजल में सात रुपये बयालीस पैसे प्रति लीटर की संचयी वृद्धि की जा चुकी है। सरकारी तेल कंपनियों ने इस वृद्धि शृंखला की शुरुआत सबसे पहले पेट्रोल पर तीन रुपये और डीजल पर तीन रुपये उनतीस पैसे बढ़ाकर की थी, जिसके बाद लगातार अलग-अलग चरणों में दाम बढ़ाए गए। इस मूल्य वृद्धि के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में परिवहन और रसद लागत बढ़ गई है।
ताजा मूल्य सूची के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल एक सौ दो रुपये बारह पैसे प्रति लीटर और डीजल पचानवे रुपये बीस पैसे प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत एक सौ ग्यारह रुपये इक्कीस पैसे और डीजल की कीमत सत्तानवे रुपये तिरासी पैसे प्रति लीटर पर स्थिर है। इसी प्रकार कोलकाता में पेट्रोल एक सौ तेरह रुपये इक्यावन पैसे व डीजल निन्यानवे रुपये बयालीस पैसे तथा चेन्नई में पेट्रोल एक सौ सात रुपये सतहत्तर पैसे व डीजल निन्यानवे रुपये पचपन पैसे प्रति लीटर की दर से उपभोक्ताओं को मिल रहा है। अन्य प्रमुख शहरों जैसे भोपाल में पेट्रोल का भाव एक सौ चौदह रुपये सत्तावन पैसे और पटना में एक सौ तेरह रुपये सैंतीस पैसे प्रति लीटर के उच्च स्तर को छू रहा है।
तेल विपणन कंपनियों के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में आई अत्यधिक तेजी के कारण घरेलू स्तर पर कंपनियों को भारी वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार, क्रूड ऑयल महंगा होने से सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और जेट फ्यूल की बिक्री पर करीब एक हजार तीन सौ अस्सी करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक दिन की मामूली नरमी का लाभ तुरंत घरेलू उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया जा सका। कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत पेट्रोलियम कंपनियां रोजाना सुबह छह बजे देश के अलग-अलग शहरों के लिए ईंधन के दामों की घोषणा करती हैं, जिसे उपभोक्ता विभिन्न कंपनियों के एसएमएस नंबरों पर कोड भेजकर घर बैठे भी जान सकते हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
