क्या है Paytm Payments Bank? डिजिटल बैंकिंग की तेज रफ्तार से विवादों तक की कहानी
आरबीआई ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी और जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ गतिविधियों के कारण नोएडा स्थित पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस 24 अप्रैल 2026 को रद्द कर दिया।

भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में कभी एक प्रमुख और प्रभावशाली नाम रहा Paytm Payments Bank ने अपनी तेज रफ्तार सेवाओं और व्यापक ग्राहक आधार के जरिए खास पहचान बनाई थी, लेकिन नियामकीय चुनौतियों के चलते इसकी यात्रा एक जटिल मोड़ पर आकर समाप्त हुई। नोएडा मुख्यालय वाला यह बैंक 2017 में शुरू हुआ और कुछ ही वर्षों में करोड़ों ग्राहकों तक पहुंच बनाकर देश के सबसे बड़े डिजिटल लेनदेन प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया। हालांकि अप्रैल 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद इसका परिचालन औपचारिक रूप से समाप्त हो गया, जिससे इसकी पूरी यात्रा पर गंभीर सवाल भी खड़े हुए।
इस बैंक की शुरुआत 2015 में उस समय हुई जब इसे भारतीय रिजर्व बैंक से पेमेंट्स बैंक स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिली। इसके बाद 28 नवंबर 2017 को इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। कंपनी के प्रमोटर विजय शेखर शर्मा ने इसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी, जबकि वन97 कम्युनिकेशंस के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। शुरुआत से ही इस बैंक ने डिजिटल सेवाओं को केंद्र में रखते हुए बचत और चालू खातों के साथ-साथ तेज भुगतान सुविधा प्रदान की, जिससे यह तेजी से लोकप्रिय हुआ।
अपने संचालन के शुरुआती वर्षों में Paytm Payments Bank ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। वित्त वर्ष 2020 में इसने 485 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए, जिनकी कुल राशि लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपये रही। जून 2022 में ही इसने 778 मिलियन से अधिक यूपीआई ट्रांजेक्शन प्रोसेस किए, जो इसकी मजबूत तकनीकी क्षमता और व्यापक उपयोगकर्ता आधार को दर्शाता है। यह बैंक भारत का सबसे बड़ा यूपीआई लाभार्थी बैंक भी बन गया था। साथ ही, इसने लाखों डेबिट कार्ड जारी किए और आईपीओ भुगतान के लिए यूपीआई हैंडल जैसी सुविधाएं भी शुरू कीं।
वित्तीय दृष्टि से भी यह बैंक चर्चा में रहा, जब 2018-19 में इसने 19 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया और भारत का पहला लाभ कमाने वाला पेमेंट्स बैंक बना। 2020 में इसका मुनाफा बढ़कर 29.8 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, इसने इंडसइंड बैंक, मास्टरकार्ड और सूर्योडय स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी कर अपनी सेवाओं का विस्तार किया, जिससे ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट और कार्ड सेवाओं का लाभ मिला।
हालांकि, इस सफलता के समानांतर नियामकीय चुनौतियां भी लगातार सामने आती रहीं। 2018 से ही भारतीय रिजर्व बैंक ने केवाईसी और ग्राहक सत्यापन प्रक्रियाओं में खामियों को लेकर इस पर प्रतिबंध लगाए। 2022 और 2024 में नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक जैसी कड़ी कार्रवाइयां की गईं। जनवरी 2024 में बैंक को नए ग्राहक जोड़ने और जमा स्वीकार करने से रोक दिया गया, और अंततः 24 अप्रैल 2026 को बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया। नियामक ने इसे बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के आधार पर यह कदम उठाया।
Paytm Payments Bank की कहानी एक ऐसे डिजिटल बैंक की है जिसने तकनीकी नवाचार और ग्राहक पहुंच के बल पर तेजी से ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन नियामकीय अनुपालन में लगातार चूक के कारण अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने में असफल रहा। यह उदाहरण भारतीय बैंकिंग प्रणाली में नियमों के महत्व और डिजिटल वित्तीय संस्थानों के लिए सख्त अनुपालन की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

Pratahkal Bureau
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