Budget Session of Parliament 2026 : संसद की दहलीज पर आज आर्थिक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक नया अध्याय तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस और शिवसेना (UBT) सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। 6 फरवरी को घोषित इस ऐतिहासिक समझौते ने जहाँ सरकार के लिए व्यापारिक लाभ के द्वार खोले हैं, वहीं विपक्ष इसे भारतीय कृषि और लघु उद्योगों के लिए 'आत्मघाती कदम' बता रहा है।

विवाद का केंद्र: क्या है यह 'ट्रेड डील' ?

पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित इस अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत, भारत और अमेरिका ने टैरिफ (सीमा शुल्क) में बड़े बदलावों पर सहमति व्यक्त की है। समझौते के तकनीकी पहलुओं ने नीतिगत गलियारों में हलचल पैदा कर दी है:

  • अमेरिकी लाभ: भारत ने अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत अमेरिकी सेब, बादाम, इथेनॉल और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) उत्पादों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे पहले से अधिक खुल जाएंगे।
  • भारतीय निर्यात को राहत: बदले में, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 25% टैरिफ को हटा दिया है। अब कपड़ा (टेक्सटाइल) और चमड़ा (लेदर) जैसे उत्पादों पर 18% की पारस्परिक दर निर्धारित की गई है।


राजनीतिक घमासान : 'नरेंद्र सरेंडर' बनाम 'निर्यात की उड़ान'

विपक्ष ने इस समझौते को भारतीय किसानों के हितों के साथ समझौता बताया है। राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'नरेंद्र सरेंडर' करार दिया। उनका आरोप है कि सस्ते अमेरिकी आयात से स्थानीय सेब उत्पादकों और पोल्ट्री किसानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

दूसरी ओर, सरकार और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का तर्क है कि यह समझौता एक बड़ी जीत है। सरकार का दावा है कि टैरिफ में कटौती से भारतीय टेक्सटाइल और लेदर सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी, जिससे देश का निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि कृषि हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।



आगामी चुनौतियां : किसान यूनियनों का अल्टीमेटम

संसद के बाहर चल रहे इस विरोध ने अब सड़कों का रुख कर लिया है। विभिन्न किसान यूनियनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। किसानों का मानना है कि आयात शुल्क में कमी से अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें गिरेंगी और स्थानीय उत्पादक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।


टैरिफ तुलनात्मक तालिका :

श्रेणी

वस्तु (Products)

पुराना टैरिफ

नया/प्रस्तावित टैरिफ

प्रभाव

अमेरिकी आयात (भारत में)

सेब, बादाम, अखरोट

उच्च (संरक्षित)

कटौती की गई

भारतीय बाजारों में अमेरिकी फल सस्ते होंगे

अमेरिकी आयात (भारत में)

इथेनॉल और पोल्ट्री

प्रतिबंधित/उच्च

सुगम पहुंच

ऊर्जा और खाद्य क्षेत्र में अमेरिकी पैठ बढ़ेगी

भारतीय निर्यात (USA में)

टेक्सटाइल (कपड़ा)

25% तक

18%

भारतीय गारमेंट्स अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी होंगे।

भारतीय निर्यात (USA में)

लेदर (चमड़ा उत्पाद)

उच्च शुल्क

18% (पारस्परिक)

कानपुर और चेन्नई के लेदर हब को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

भारतीय निर्यात (USA में)

स्टील और एल्युमीनियम

अतिरिक्त शुल्क

हटाया गया

भारतीय भारी उद्योगों को निर्यात में बड़ी राहत।


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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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