'चुनाव खत्म होते ही तेल की कीमतों में वसूली शुरू'- विपक्ष ने घेरा; क्या अब महंगाई की आग में झुलसेगी अर्थव्यवस्था?
ईंधन की कीमतों में ₹3 की वृद्धि पर विपक्ष ने केंद्र को घेरा। दिल्ली-कोलकाता में पेट्रोल-डीजल महंगा, कांग्रेस ने कहा- चुनाव खत्म होते ही महंगाई का हमला शुरू।

नई दिल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते राहुल गांधी और साथ में पेट्रोल पंप की नोजल का सांकेतिक चित्र।
petrol price hike : भारत में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी शांत होते ही आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक नया और भारी बोझ लाद दिया गया है। शुक्रवार, 15 मई 2026 को केंद्र सरकार द्वारा देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी के बाद देश का सियासी पारा गरमा गया है। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बहाने किए गए इस फैसले ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार थमा दिया है। कांग्रेस समेत अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे 'वसूली काल' की शुरुआत करार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले की गूँज तब और तेज हो गई जब कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की आर्थिक नीतियों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर रही थीं, तब सरकार ने उसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया और अब जब मामूली वैश्विक संकट आया है, तो सारा बोझ जनता पर डाल दिया गया है। कांग्रेस ने पीएम मोदी को 'महंगाई का आदमी' संबोधित करते हुए तंज कसा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इसी सुर में सुर मिलाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि यह सरकार पहले वोट लूटती है और फिर वहीं चोट करती है जहां सबसे ज्यादा दर्द होता है।
'महंगाई मैन' मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया.
— Congress (@INCIndia) May 15, 2026
• पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया
• वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए
चुनाव खत्म - मोदी की वसूली शुरू
ईंधन की इस नई कीमतों ने महानगरों के गणित को पूरी तरह बदल दिया है। दिल्ली में पेट्रोल अब 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 90.67 रुपये के पार पहुँच गया है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तो पेट्रोल की कीमतें 108.74 रुपये प्रति लीटर के खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि ईंधन के दाम बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे इस वित्तीय वर्ष में मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर 6% के करीब पहुँच सकती है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो देश के विकास अनुमानों में भारी कटौती करनी पड़ सकती है, जो पहले से ही वैश्विक अस्थिरता के कारण दबाव में हैं।
For years when international oil prices were soft or declining, the Indian National Congress had been urging that those benefits should be passed on to Indian consumers and that domestic prices of gas, petrol, and diesel should be reduced. That, however, did not happen and…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 15, 2026
सरकारी पक्ष की ओर से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि यदि खुदरा कीमतों में संशोधन नहीं किया गया, तो तेल कंपनियों को एक ही तिमाही में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो सकता है। सरकार का तर्क है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। हालांकि, विपक्ष इस तर्क को मानने को तैयार नहीं है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और सोने के आयात को कम करने की अपील की है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के ये बचाव कार्य जनता के बढ़ते गुस्से और आसन्न आर्थिक मंदी को रोकने में कितने कारगर साबित होते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
