एनएसई ने पावर मार्केट कपलिंग पर सीईआरसी के नए नियमों का स्वागत किया
ग्रिड इंडिया द्वारा पीएमसीपी तैयार करने और 'वन नेशन, वन ग्रिड, वन प्राइस' को लागू करने से डिस्कॉम्स का वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बिजली बाजार में पारदर्शिता और एक समान मूल्य निर्धारण के लिए नए विनियामक संशोधनों को सकारात्मक बताया है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) ने इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (सीईआरसी) द्वारा जारी पावर मार्केट (ड्राफ्ट सेकंड संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना का स्वागत किया है, जो मार्केट कपलिंग लागू करने से संबंधित है। यह कदम भारतीय पावर मार्केट में पारदर्शिता, कार्यक्षमता और एक समान मूल्य निर्धारण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, ग्रिड इंडिया (भारत सरकार का उपक्रम) आयोग की मंजूरी से अगले छह महीनों के भीतर पावर मार्केट कपलिंग प्रोसीजर (पीएमसीपी) तैयार करेगा, ताकि विभिन्न पावर एक्सचेंजों में मार्केट कपलिंग लागू की जा सके। एनएसई के अनुसार, यह सुधार “वन नेशन, वन ग्रिड, वन प्राइस” के सिद्धांत को साकार करने की दिशा में लंबे समय से प्रतीक्षित पहल है, जिससे पावर मार्केट और मजबूत होगा तथा सटीक मूल्य निर्धारण संभव होगा।
मार्केट कपलिंग लागू होने पर मार्केट कपलिंग ऑपरेटर के रूप में ग्रिड इंडिया सभी तीन स्पॉट पावर एक्सचेंजों—पीएक्सआईएल, आईईएक्स और एचपीएक्स—से प्राप्त बोलियों को एकत्रित करेगा और केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से उनका मिलान कर एक समान मार्केट-क्लियरिंग प्राइस तय करेगा। इसके बाद सभी स्पॉट एक्सचेंज अपने-अपने ट्रेड इसी एक निर्धारित मूल्य के आधार पर सेटल करेंगे।
यह प्रणाली एनएसई के मंथली इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट मॉडल से मेल खाती है, जिसमें अंतिम सेटलमेंट प्राइस या ड्यू डेट रेट (डीडीआर) तीनों स्पॉट पावर एक्सचेंजों की दैनिक कीमतों के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज के आधार पर तय किया जाता है। यह गणना डीएएम के सभी सेगमेंट—कन्वेंशनल, ग्रीन और हाई प्राइस—तथा प्रत्येक दिन के 96 टाइम ब्लॉक्स को ध्यान में रखकर की जाती है। इसके विपरीत, कुछ एक्सचेंज केवल दैनिक कीमतों का साधारण औसत अपनाते हैं, जिसमें ट्रेडिंग वॉल्यूम को शामिल नहीं किया जाता। एनएसई का डीडीआर मॉडल वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें वास्तविक ट्रेडिंग वॉल्यूम को उचित वेटेज देकर अधिक सटीक और विश्वसनीय मूल्य निर्धारित किया जाता है।
जुलाई 2025 में इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स शुरू होने के बाद से मार्च 2026 तक पावर एक्सचेंजों में स्पॉट बिजली की कीमतों में लगभग 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिससे समग्र सामाजिक लाभ में वृद्धि हुई है। वैश्विक मानकों के अनुरूप यह अपेक्षा जताई जा रही है कि मार्केट कपलिंग ऑपरेटर भी वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइसिंग प्रणाली को अपनाएगा।
हालांकि, वर्तमान में मार्केट कपलिंग लागू नहीं होने के कारण कीमतों में उल्लेखनीय अंतर बना हुआ है। 20 अप्रैल 2026 तक अप्रैल माह के लिए एनएसई का मंथली मूविंग एवरेज ड्यू डेट रेट (एमएवीजीडीडीआर) लगभग ₹3,802 प्रति मेगावाट-घंटा है, जबकि साधारण औसत पद्धति से यह कीमत लगभग ₹4,442 प्रति मेगावाट-घंटा आंकी गई है। इस अंतर के कारण दोनों फाइनेंशियल एक्सचेंजों के बीच प्रति मेगावाट-घंटा लगभग ₹600–700 का मूल्य अंतर उत्पन्न हो रहा है।
यदि प्रति माह लगभग 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की खपत मानी जाए, तो इस अंतर के चलते डिस्कॉम्स पर हर महीने लगभग ₹70 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है, जो वार्षिक रूप से करीब ₹840 करोड़ तक पहुंच सकता है। चूंकि स्पॉट मार्केट में इससे अधिक मात्रा में बिजली का व्यापार होता है, इसलिए इसका समग्र प्रभाव डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
इस संदर्भ में एनएसई के एमडी एवं सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि नया संशोधन और इसके तहत मार्केट कपलिंग का कार्यान्वयन पावर मार्केट में पारदर्शिता और कार्यक्षमता को बढ़ाने वाला सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि शीघ्र कार्यान्वयन से तीनों स्पॉट एक्सचेंज और दो फाइनेंशियल एक्सचेंजों के लिए एक समान मूल्य निर्धारण संभव होगा, जिससे मूल्य खोज प्रक्रिया सुदृढ़ होगी, स्पॉट और फ्यूचर्स दोनों बाजार मजबूत होंगे और पावर सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। यह विकास भारतीय ऊर्जा बाजार के ढांचे को अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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