मटन-चावल की दुकान पर 50 लाख का टर्नओवर! एक वीडियो ने कैसे खोल दी लाखों की कमाई की पोल?
सोशल मीडिया पर रील वायरल होने के बाद हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग पर स्थित दुकान का 50 लाख का टर्नओवर उजागर, कर विभाग ने दिया नोटिस।

नैनीताल: सोशल मीडिया की ताकत आज किसी को भी रातों-रात मशहूर कर सकती है, लेकिन कभी-कभी यही शोहरत सरकारी विभागों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लेती है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला उत्तराखंड के प्रसिद्ध हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे से सामने आया है। यहां एक बेहद साधारण सी दिखने वाली 'पहाड़ी मटन-चावल' की दुकान इन दिनों न केवल पर्यटकों, बल्कि राज्य कर विभाग (जीएसटी) के लिए भी चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। इस दुकान के स्वाद की तारीफ करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल क्या हुआ, टैक्स विभाग की टीम ने सीधे दुकान पर ही दस्तक दे दी। जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया है—इस छोटी सी दुकान का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये से अधिक का पाया गया है, जबकि इसके पास कोई भी जीएसटी पंजीकरण नहीं है।
यह चर्चित मटन-चावल की दुकान हल्द्वानी-नैनीताल मुख्य मार्ग पर नयना गांव के पास स्थित है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ नैनीताल घूमने आने वाले पर्यटकों और सरकारी कर्मचारियों के बीच यह दुकान अपने खास 'पहाड़ी मटन-चावल' के स्वाद के लिए बहुत लोकप्रिय है। लोग दूर-दूर से इस ढाबे का पारंपरिक स्वाद चखने के लिए यहां रुकते हैं। हाल ही में, एक फूड व्लॉगर ने इस दुकान का एक वीडियो (रील) इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था। इस वायरल रील में साफ तौर पर दावा किया गया था कि इस छोटी सी दुकान पर इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि यहां एक ही दिन में चावल के साथ कम से कम तीन बकरों के मांस की बिक्री हो जाती है। यह रील इंटरनेट पर तेजी से फैली और लाखों लोगों ने इसे देखा।
इस वायरल वीडियो पर सिर्फ खाने के शौकीनों की ही नजर नहीं पड़ी, बल्कि राज्य कर विभाग (जीएसटी) के अधिकारियों ने भी इसे गंभीरता से लिया। वीडियो में किए गए भारी बिक्री के दावों का संज्ञान लेते हुए, जीएसटी विभाग की एक विशेष टीम ने नयना गांव स्थित इस दुकान पर अचानक औचक निरीक्षण किया। जांच दल ने जब दुकान के मालिक चंदन सिंह से दुकान की बिक्री और टैक्स दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की, तो चौंकाने वाली वित्तीय जानकारी सामने आई। आधिकारिक जांच में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि इस 'पहाड़ी मटन-चावल' की दुकान का वार्षिक कारोबार 50 लाख रुपये की सीमा को पार कर चुका है।
जीएसटी नियमों के अनुसार, यदि किसी भोजनालय या ढाबे का सालाना टर्नओवर एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से जीएसटी के तहत पंजीकृत होना चाहिए और अपनी बिक्री पर निर्धारित टैक्स (कर) चुकाना चाहिए। भोजनालयों के लिए यह दर सामान्यतः 5 प्रतिशत बिक्री कर के रूप में देय होती है। हालांकि, जांच में यह तथ्य सामने आया कि करोड़ों का कारोबार करने के बावजूद दुकान मालिक ने अब तक अपना जीएसटी पंजीकरण ही नहीं कराया था, जिससे सरकारी खजाने को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा था।
राज्य कर विभाग ने इस कर चोरी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने दुकान मालिक चंदन सिंह को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह 12 जून तक अपना जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा करवा लें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दी गई समय सीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो दुकान संचालक के खिलाफ जीएसटी अधिनियम की सुसंगत और सख्त धाराओं के तहत कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, दुकान के मालिक ने आवश्यक दस्तावेज जुटाने और पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विभाग से कुछ दिनों का समय मांगा है। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर किया गया दिखावा या वायरल होना कभी-कभी भारी भी पड़ सकता है। नैनीताल हाईवे की यह दुकान, जो कल तक सिर्फ अपने लजीज स्वाद के लिए जानी जाती थी, आज अपनी लाखों की कमाई और टैक्स चोरी के मामले को लेकर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
