share bazar aaj sensex girawat news : अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत घोषणा से पहले वैश्विक बाजारों में फैली बेचैनी का सीधा असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गहरे लाल निशान में बंद हुए। बीते दो दिनों की बढ़त थम गई और निवेशकों ने एक बार फिर यह महसूस किया कि विदेशी फंडों की निकासी और वैश्विक आर्थिक संकेत कितनी तेजी से बाजार की दिशा बदल सकते हैं।

सप्ताह की शुरुआत से ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपना लिया था। ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में ही बिकवाली का दबाव ऐसे बढ़ा कि सेंसेक्स 836 अंकों तक गिर गया और आखिरकार 609.68 अंक टूटकर 85,102.69 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी भी 294 अंकों की भारी गिरावट के बाद संभल नहीं पाया और 225.90 अंक लुढ़ककर 25,960.55 पर दिन खत्म किया। फेड की दो दिवसीय बैठक से पहले भारतीय बाजारों में यह माहौल आशंका और अनिश्चितता का संकेत दे रहा था।

रियल्टी, धातु और ऊर्जा सेक्टरों में सबसे ज्यादा चोट लगी, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर गिरावट और भी तीखी रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और मिडकैप 100 इंडेक्स पर बिकवाली ऐसे टूटी कि दिन भर ये सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक नुकसान में रहे और पिछले पाँच दिनों में कुल 4 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट दर्ज करा चुके हैं। इंटरग्लोब एविएशन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसे बड़े शेयर 7 प्रतिशत तक टूटे, जबकि केवल एचडीएफसी लाइफ और टेक महिंद्रा जैसे चुनिंदा शेयर ही हल्की बढ़त के साथ टिक पाए।

निवेशकों की चिंता विदेशी फंडों की लगातार निकासी से और गहरी हो गई। एफआईआई ने सातवें दिन भी बिकवाली जारी रखते हुए शुक्रवार को करीब ₹439 करोड़ की इक्विटी बेच डाली। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों पर वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर एशियाई बाजार और बीते हफ्तों की तेज़ रैली के बाद ऊँचे हो चुके वैल्यूएशन अब बाजार को अधिक संवेदनशील बना रहे हैं।

रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा कमजोर की। विदेशी पूंजी के बहिर्गमन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 90.11 तक गिर गया। वहीं वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 63.83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिसने भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति की आशंकाओं को फिर बढ़ा दिया।

अस्थिरता सूचकांक इंडिया VIX में 8 प्रतिशत की तेज़ छलांग ने बाजार की चिंता को और पुख्ता कर दिया। 11.12 के स्तर तक पहुँचा VIX बता रहा था कि निवेशकों की घबराहट बढ़ रही है और वे जोखिम वाले सौदों से बाहर निकलने को मजबूर हैं।

तकनीकी संकेत भी बाजार की इस गिरावट की पुष्टि कर रहे थे। निफ्टी का 21-डीएमए के नीचे फिसलना, एमएसीडी पर सेल सिग्नल और आरएसआई में कमजोर होता मोमेंटम इस बात का संकेत दे रहा है कि बाजार एक संभावित समेकन चरण में प्रवेश कर चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूचकांक निकट भविष्य में 25,800 से 26,200 के दायरे में घूम सकता है, जब तक कि वैश्विक संकेतों में स्पष्टता न आए।

सोमवार की गिरावट ने निवेशकों को एक बार फिर याद दिला दिया कि वैश्विक मौद्रिक नीतियाँ और विदेशी फंडों का मूड शेयर बाजार की नस-नस को प्रभावित करता है। अब सभी की नजर अमेरिकी फेड की बैठक पर टिक गई है, जिसके नतीजे तय करेंगे कि क्या बाजार को राहत मिलेगी या यह दबाव आगे भी जारी रहेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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