West Bengal Assembly Dissolved 2026 : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय का अंत हो रहा है। राज्यपाल द्वारा 7 मई को विधानसभा भंग किए जाने के साथ ही तृणमूल कांग्रेस के एक दशक से भी लंबे शासन पर विराम लग गया है। शनिवार, 9 मई को राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगने वाली है, लेकिन इस प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच देश की निगाहें निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस जीवनशैली पर टिकी हैं, जो भारतीय राजनीति में विरली मानी जाती है। सत्ता के शीर्ष पर रहने के बावजूद ममता बनर्जी ने पिछले 15 वर्षों में मुख्यमंत्री के रूप में एक भी रुपया वेतन नहीं लिया और न ही कभी पूर्व सांसद या विधायक के तौर पर मिलने वाली पेंशन का लाभ उठाया। ऐसे में यह सवाल हर किसी के जेहन में है कि बिना सरकारी आर्थिक मदद के आखिर 'दीदी' का गुजारा कैसे होता रहा और अब पदमुक्त होने के बाद वे कितनी पेंशन की हकदार होंगी।

ममता बनर्जी की आजीविका का रहस्य उनके राजनीतिक व्यक्तित्व के पीछे छिपे उनके रचनात्मक कौशल में निहित है। एक राजनेता होने के साथ-साथ वे एक लोकप्रिय लेखिका और गीतकार भी हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनसे मिलने वाली रॉयल्टी उनकी आय का सबसे बड़ा और प्राथमिक स्रोत है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, किताबों की बिक्री से उन्हें सालाना 10 से 11 लाख रुपये की रॉयल्टी प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, वे संगीत और पेंटिंग में भी गहरी रुचि रखती हैं। उनके द्वारा लिखे गए गीतों के लिए प्रोडक्शन हाउस उन्हें सालाना लगभग 3 लाख रुपये तक का भुगतान करते हैं। ममता बनर्जी ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि चूंकि वे अकेली रहती हैं, इसलिए उनकी व्यक्तिगत जरूरतें बेहद सीमित हैं और उनकी रचनात्मक कृतियों से होने वाली कमाई उनके निर्वाह के लिए पर्याप्त है।

अब जब वे मुख्यमंत्री पद से हट रही हैं, तो उनके सामने पेंशन के कई विकल्प मौजूद होंगे। सात बार सांसद रहने के कारण उनके पास संसदीय करियर का एक लंबा अनुभव है। वर्तमान नियमों के अनुसार, पांच वर्ष की सेवा वाले पूर्व सांसद को 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जिसमें प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए 2,500 रुपये की वृद्धि होती है। उनके 25-30 वर्षों के संसदीय जीवन को देखते हुए, उनकी संभावित सांसद पेंशन ही प्रति माह 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये के बीच हो सकती है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के नियमों के तहत एक पूर्व विधायक को भी पेंशन का अधिकार है, जो वर्तमान में लगभग 1.21 लाख रुपये प्रति माह के स्तर पर है।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, जो व्यक्ति सांसद और विधायक दोनों पदों पर रह चुका हो, उसे किसी एक पेंशन का चुनाव करना होता है, जो आमतौर पर अधिक राशि वाली होती है। ममता बनर्जी के मामले में उनकी सांसद पेंशन सबसे अधिक होने की संभावना है। इसके साथ ही, एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में वे आजीवन चिकित्सा सुविधाओं, जेड प्लस (Z+) सुरक्षा, विशेष स्टाफ और सरकारी आवास जैसी विशिष्ट सुविधाओं की भी हकदार होंगी। हालांकि, अपने पूरे करियर में सरकारी धन को ठुकराने वाली ममता बनर्जी क्या अब इन लाभों को स्वीकार करेंगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। उनका यह फैसला न केवल उनके भविष्य की वित्तीय स्थिति तय करेगा, बल्कि भारतीय राजनीति में सादगी और सिद्धांतों की उनकी छवि को भी नया आयाम देगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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