Maharashtra Commodity Prices MSP 2026 : महाराष्ट्र के कृषि परिदृश्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धड़कन मानी जाने वाली कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) से इस वक्त की सबसे बड़ी और व्यापक आर्थिक हलचल सामने आ रही है। राज्य के सभी जिलों से छनकर आ रहे आधिकारिक आंकड़ों ने इस बार किसानों, व्यापारियों और बाजार विश्लेषकों को एक साथ चौंका दिया है। २६ मई २०२६ तक के संकलित किए गए ताजा तीन दिवसीय आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र की विभिन्न मंडियों में प्रमुख खरीफ और रबी फसलों की आवक और उनकी कीमतों में एक अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुकाबले कई फसलों के दाम खुले बाजार में आसमान छू रहे हैं, वहीं कुछ फसलों की आवक में आई भारी गिरावट ने आने वाले दिनों में कृषि संकट और आपूर्ति श्रृंखला की नई चुनौतियों की ओर इशारा कर दिया है।

इस तीन दिवसीय मंडी समीक्षा के मुख्य घटनाक्रम पर नजर डालें तो अनाजों के वर्ग में मोटे अनाजों (मिलेट्स) और मुख्य फसलों के बीच कीमतों का एक बड़ा अंतर खुलकर सामने आया है। महाराष्ट्र के खानदेश और मराठवाड़ा क्षेत्रों में मुख्य भोजन माने जाने वाले ज्वार की कीमतों ने इस बार बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया है। २६ मई को मंडियों में ज्वार का औसत भाव चार हजार नौ सौ एकावन रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो कि इसके निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी अधिक है। हालांकि, इसकी आवक तेजी से घटते हुए २१७.२० मीट्रिक टन से सीधे १३९ मीट्रिक टन पर सिमट गई है। इसी तरह, बाजरा का बाजार भी गर्म है, जहां एमएसपी न होने के बावजूद यह २६ मई को तीन हजार चार सौ पैंतालीस रुपये प्रति क्विंटल के मजबूत स्तर पर बिका। इसके विपरीत, राज्य की सबसे प्रमुख फसल धान (सामान्य) की आवक में भारी उछाल देखा गया है, जो २४ मई के २४३.६० मीट्रिक टन से बढ़कर २६ मई को भले ही ७३.२० मीट्रिक टन के स्तर पर दिखी, लेकिन इसकी कीमतें दो हजार सात सौ एक रुपये प्रति क्विंटल के आसपास घूम रही हैं, जो इसके दो हजार चार सौ रुपये के एमएसपी से ऊपर बनी हुई हैं। गेहूं के बाजार में भी मंदी का असर साफ दिख रहा है, जहां २४ मई को पांच हजार तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल पर बिकने वाला गेहूं २४ मई को गिरकर दो हजार तीन सौ उनहत्तर रुपये के निचले स्तर पर आ गया।

नकदी फसलों और फाइबर क्रॉप्स के मोर्चे पर कानूनी और व्यापारिक स्तर पर सबसे बड़ी हलचल कपास के बाजार में देखी जा रही है। महाराष्ट्र के विदर्भ और कपास पट्टी में सफेद सोने के नाम से मशहूर कपास की आवक लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार द्वारा विपणन वर्ष २०२६-२७ के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य सात हजार सात सौ दस रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमतें आठ हजार छह सौ सत्तर रुपये से लेकर आठ हजार नौ सौ सतहत्तर रुपये प्रति क्विंटल के बीच झूल रही हैं। कीमतों में इस मजबूती के बावजूद मंडियों में कपास की आवक लगातार गिर रही है, जो २२ मई के ८२.८० मीट्रिक टन से टूटकर २६ मई को मात्र २८.४० मीट्रिक टन रह गई है। यह स्थिति कपड़ा मिलों और कपास निर्यातकों के लिए आने वाले समय में कच्चे माल की भारी किल्लत का संकेत दे रही है।

तिलहन और तेल बाजार के आधिकारिक पहलुओं की समीक्षा करें तो तिल (सेसमम) के बाजार में आई सनसनीखेज तेजी ने सभी व्यापारिक अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है। सरकार ने तिलहन को बढ़ावा देने के लिए तिल का एमएसपी नौ हजार आठ सौ छेयालीस रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था, लेकिन मंडियों में इसकी भारी कमी के चलते २४ मई को इसका भाव चौदह हजार पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया, जो २६ मई को भी दस हजार दो सौ सत्तर रुपये के ऊंचे स्तर पर बना रहा। मूंगफली और सरसों के बाजारों में भी यही रुख देखने को मिला है। मूंगफली का भाव सात हजार दो सौ साठ रुपये के एमएसपी के मुकाबले सात हजार छह सौ बयासी रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ, जबकि सरसों की कीमतें छह हजार दो सौ रुपये के आधिकारिक एमएसपी को बहुत पीछे छोड़ते हुए आठ हजार उनतीस रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू चुकी हैं।

निश्चित रूप से, महाराष्ट्र के सभी जिलों से सामने आए ये आंकड़े केवल फसलों की खरीद-बिक्री के नंबर मात्र नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की आने वाली ग्रामीण क्रय शक्ति और खाद्य महंगाई की दिशा तय करने वाले कूटनीतिक दस्तावेज हैं। जहां एक तरफ एमएसपी से अधिक मिल रहे दाम किसानों के चेहरों पर आंशिक खुशी ला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मंडियों में फसलों की घटती आवक और कीमतों की यह अनियंत्रित रफ्तार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर उत्पादन और मौसम के मिजाज ने आपूर्ति तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले हफ्तों में राज्य का कृषि विपणन विभाग और विनियामक संस्थाएं इस बाजार असंतुलन को पाटने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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