औद्योगिक जगत से जुड़ा कपूर परिवार का आंतरिक विवाद अब एक गंभीर कानूनी और पारिवारिक संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसमें दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की विरासत और आरके फैमिली ट्रस्ट पर नियंत्रण को लेकर रानी कपूर और प्रिया सचदेव कपूर आमने-सामने आ गई हैं। यह मामला अब न्यायिक दखल के साथ-साथ मध्यस्थता की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचने की सख्त सलाह दी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई शामिल थे, ने इस पारिवारिक विवाद पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आप सभी क्यों लड़ रहे हैं? आपकी उम्र 80 वर्ष है, यह लड़ाई का समय नहीं है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में लगातार अदालत में संघर्ष किसी के हित में नहीं होता और दोनों पक्षों को मध्यस्थता का रास्ता अपनाना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “एक बार में, पूरी तरह से मध्यस्थता की जाए, वरना यह केवल समय की बर्बादी है।”

यह विवाद उस समय और तेज हो गया जब ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स से जुड़े कपूर परिवार में आरके फैमिली ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर मतभेद बढ़ गए। प्रिया सचदेव कपूर, जो दिवंगत संजय कपूर की पत्नी हैं, ने रानी कपूर को ट्रस्ट से हटाने के लिए औपचारिक नोटिस जारी किया है। प्रिया का कहना है कि यह ट्रस्ट वर्ष 2017 में रानी कपूर द्वारा अपने पुत्र संजय कपूर के लाभ के लिए स्थापित किया गया था, जो उनके जीवनकाल में इसके एकमात्र लाभार्थी थे। संजय कपूर कंपनी सोना कॉमस्टार के चेयरमैन भी रह चुके हैं।

नोटिस में प्रिया सचदेव कपूर ने आरोप लगाया कि रानी कपूर ट्रस्ट की वैधता को चुनौती दे रही हैं और इसकी संपत्तियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं, जिससे वह ट्रस्टी के रूप में कार्य करने में अक्षम हो गई हैं। इसी आधार पर उन्होंने रानी कपूर को ट्रस्टी पद से हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि 25 मार्च 2026 से उन्हें आरके फैमिली ट्रस्ट के किसी भी निर्णय, संपत्ति या दस्तावेज़ से संबंधित कोई अधिकार, भूमिका या पहुंच नहीं होगी।

इस पूरे विवाद के केंद्र में फैमिली ट्रस्ट का नियंत्रण, कपूर परिवार के विशाल कारोबारी साम्राज्य की विरासत और दोनों पक्षों के बीच लगाए जा रहे प्रबंधन संबंधी आरोप शामिल हैं। एक ओर जहां प्रिया सचदेव कपूर ट्रस्ट संचालन में पारदर्शिता और नियंत्रण का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर रानी कपूर की भूमिका और अधिकारों को लेकर गंभीर कानूनी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता की सलाह ने इस बहुचर्चित पारिवारिक और कारोबारी विवाद को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष न्यायालय के बाहर समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या यह संघर्ष और लंबा खिंचता है। यह मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े कॉर्पोरेट साम्राज्य की विरासत और नियंत्रण की जटिल कानूनी लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story