देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ आज से आम निवेशकों के सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है। कुल 30,213 करोड़ रुपये के इस विशाल आईपीओ का देश और दुनिया भर के निवेशकों को काफी समय से बेसब्री से इंतजार था। निवेशकों के बीच इस आईपीओ को लेकर कितना जबरदस्त उत्साह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब कंपनी ने अपनी एंकर बुक खोली थी, तो उसमें लगभग 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटन के मुकाबले करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस आईपीओ की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर विशेष रूप से रिजर्व रखे गए हैं।

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश इश्यू पर आधारित है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस ऑफर के तहत कंपनी का कोई भी मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहा है, बल्कि नया फंड जुटाया जा रहा है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर 2026 तक सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए प्रति शेयर प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया है। जो निवेशक इस आईपीओ में दांव लगाना चाहते हैं, उनके लिए कम से कम 12 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। अगर 1,119 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से हिसाब लगाएं, तो एक लॉट के लिए आवेदक को कम से कम 13,428 रुपये का निवेश करना पड़ेगा।

कंपनी ने निवेशकों को 12 शेयरों के मल्टीपल में आगे के लॉट के लिए अप्लाई करने की सुविधा दी है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर कोई भी शेयरधारक अधिकतम 14 लॉट के लिए बोली लगा सकता है, जिसके तहत उन्हें कुल 168 शेयर मिलेंगे और इसके लिए उन्हें 1.87 लाख रुपये की रकम की जरूरत होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरों के मालिकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के विशेष 'शेयरहोल्डर रिजर्वेशन' के तहत शेयर पाने का एक शानदार और अतिरिक्त अवसर मौजूद है। जो निवेशक योग्य हैं, वे 'शेयरहोल्डर' और 'रिटेल' दोनों श्रेणियों में अलग-अलग आवेदन दाखिल कर सकते हैं, जिससे उन्हें आईपीओ में शेयर मिलने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, इस कोटा का फायदा उठाने के लिए शर्त यह है कि 14 अक्टूबर 2026 तक जिन व्यक्तिगत निवेशकों के डिमैट खाते में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर मौजूद थे, केवल वही इस रिजर्वेशन के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे। 14 अक्टूबर या उसके बाद रिलायंस के शेयर खरीदने वाले निवेशक इस श्रेणी के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।

अगर बाजार के अनौपचारिक संकेतों और ग्रे मार्केट की बात करें, तो आईपीओ खुलने से ठीक पहले जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी लगभग 260 रुपये दर्ज किया जा रहा था। 1,119 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर यह जीएमपी करीब 23.24 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शा रहा है। इस मौजूदा जीएमपी के अनुमान के आधार पर शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,379 रुपये प्रति शेयर के आसपास बैठती है। हालांकि, शेयर बाजार के जानकार हमेशा यह स्पष्ट करते हैं कि ग्रे मार्केट की कीमतें पूरी तरह अनौपचारिक होती हैं, जो मांग और माहौल के साथ लगातार बदलती रहती हैं और इनसे लिस्टिंग पर निश्चित मुनाफे की कोई गारंटी नहीं होती।

शेड्यूल के अनुसार, आईपीओ बंद होने के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल होने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद 28 अक्टूबर को इन शेयरों की देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई और एनएसई पर एक साथ लिस्टिंग हो सकती है। इस पूरे पब्लिक ऑफर में कुल 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जा रहे हैं, जिनसे ऊपरी प्राइस बैंड पर 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस तय कीमत के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल मार्केट वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठता है, जो इसे भारत की सबसे मूल्यवान और टॉप कंपनियों की सूची में मजबूती से खड़ा कर देगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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