नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज जूलरी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के लिए काला दिन साबित हुआ है। देश में शादियों के भव्य सीजन के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में जूलरी कंपनियों के शेयरों में ऐसी सुनामी आई कि निवेशकों के करोड़ों रुपये पलक झपकते ही स्वाहा हो गए। बाजार खुलते ही टाइटन, सेनको गोल्ड और कल्याण ज्वेलर्स जैसी नामचीन कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इस अप्रत्याशित मंदी का सीधा संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए उस संबोधन से है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद से परहेज करने की भावुक अपील की है। सरकार का यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने और व्यापार घाटे को कम करने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सेनको गोल्ड के शेयरों में सबसे भीषण गिरावट देखी गई। यह शेयर 10 प्रतिशत तक लुढ़क कर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 325.25 रुपये के स्तर पर आ गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 365.45 रुपये पर स्थिर था। इसी प्रकार, दक्षिण भारत की प्रमुख जूलरी रिटेलर कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों में भी 9.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह 382.20 रुपये के निचले स्तर तक जा गिरा। टाटा समूह की प्रतिष्ठित कंपनी टाइटन के शेयर भी इस बिकवाली से अछूते नहीं रहे और करीब 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,151.40 रुपये पर कारोबार करते देखे गए। बाजार के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील ने बाजार में यह संदेश भेजा है कि आने वाले समय में मांग में भारी कमी आ सकती है, जिससे इन कंपनियों के भविष्य के मुनाफे पर संकट मंडरा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील के पीछे ठोस आर्थिक तर्क छिपे हुए हैं। भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता राष्ट्र है और अपनी अधिकांश मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने औसतन हर महीने लगभग 60 टन सोने का आयात किया था, जिसकी मासिक लागत करीब 6 अरब डॉलर बैठती है। इतनी भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा का बाहर जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और विशेषकर चालू खाता घाटे के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। पीएम की अपील का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत करना है, जिसे विकास कार्यों में उपयोग किया जा सके। हालांकि, यह अपील ऐसे समय आई है जब जूलरी कंपनियों ने हाल ही में शानदार तिमाही परिणाम घोषित किए थे। टाइटन का शुद्ध लाभ चौथी तिमाही में 35 प्रतिशत बढ़कर 1,179 करोड़ रुपये रहा था, वहीं कल्याण ज्वेलर्स ने 118 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 409.5 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।

आर्थिक मोर्चे पर अन्य तकनीकी कारण भी जूलरी शेयरों पर दबाव बना रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष के अप्रैल माह में सोने का आयात महज 15 टन रहने का अनुमान है, जो पिछले तीन दशकों का सबसे निचला स्तर होगा। इसका एक बड़ा कारण बैंकों द्वारा सोने के आयात को रोकना भी है, क्योंकि सरकार ने उन पर 3 प्रतिशत एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) वसूलना शुरू कर दिया है। कानूनी और कर संबंधी इन जटिलताओं ने पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर रखा था और अब प्रधानमंत्री की सीधी अपील ने मांग पक्ष को भी कमजोर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय उपभोक्ता अपनी परंपरा को छोड़कर पीएम की अपील का समर्थन करते हैं या जूलरी सेक्टर में रिकवरी की कोई संभावना बनती है। फिलहाल, जूलरी बाजार के लिए भविष्य की राह चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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