प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत देश में हर चौथा खाता निष्क्रिय पड़ा हुआ है, जबकि लगभग 5.72 करोड़ खातों में शून्य शेष (जीरो बैलेंस) राशि है। वित्त मंत्रालय द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दिए गए जवाब में यह चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय मिशन के रूप में अगस्त 2014 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य हर परिवार को एक बुनियादी बैंक खाता, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था। वित्तीय सेवा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त, 2026 तक देश भर में कुल 59,03,74,907 जनधन खाते संचालित थे, जिनमें कुल 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा थी। आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ के आवेदन पर यह जानकारी सामने आए आंकड़ों के अनुसार कुल खातों में महिलाओं के 32.89 करोड़ और पुरुषों के 26.14 करोड़ खाते शामिल हैं।

विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में 5,72,35,490 खातों में एक भी पैसा जमा नहीं है, जबकि 15,36,77,009 खाते पूरी तरह से निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) हो चुके हैं। जीरो बैलेंस वाले खातों के मामले में उत्तर प्रदेश 95.92 लाख खातों के साथ देश में सबसे ऊपर है। इसके बाद बिहार (62.35 लाख), पश्चिम बंगाल (37.20 लाख), असम (36.30 लाख) और महाराष्ट्र (36.04 लाख) का स्थान आता है।

निष्क्रिय खातों की स्थिति में भी उत्तर प्रदेश 3.23 करोड़ खातों के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। इसके बाद बिहार में 1.59 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.35 करोड़, पश्चिम बंगाल में 1.02 करोड़ और महाराष्ट्र में 97.94 लाख खाते निष्क्रिय पाए गए हैं। कुल जनधन खातों की संख्या के लिहाज से भी उत्तर प्रदेश 10.51 करोड़ खातों के साथ पहले पायदान पर है, जिसके बाद बिहार और अन्य राज्य आते हैं। हालांकि, सरकार के पास लिंग आधारित विस्तृत शेष राशि, पांच साल से बंद खातों और साइबर धोखाधड़ी से फ्रीज खातों के केंद्रीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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