देश में चीनी की कीमतों में हाल ही में काफी तेजी आई है और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। आगामी त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में आई इस तेज वृद्धि ने सरकार और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस स्थिति से निपटने और चीनी के दामों को नियंत्रित करने के लिए इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने एक अहम कदम उठाया है। ISMA के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी ने एनबीटी से बातचीत में स्पष्ट किया है कि यदि सरकार कुछ शर्तों को मान ले, तो शुगर मिलें नए सीजन में तय समय से 15 से 20 दिन पहले ही उत्पादन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिससे बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

मौजूदा हालात और चीनी के भंडार की बात करें तो चालू शुगर सीजन आगामी 30 सितंबर को समाप्त होने जा रहा है। इस समय तक देश में लगभग 40 लाख टन चीनी का भंडार बचने का अनुमान है। इसके बाद अक्टूबर के महीने में करीब 24 से 25 लाख टन चीनी की खपत होने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद देश में लगभग 15 लाख टन चीनी सुरक्षित बची रहेगी। नए सीजन के तहत अक्टूबर के मध्य यानी 15 से 20 तारीख तक महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों में गन्ने की पेराई और नई चीनी का उत्पादन शुरू हो जाता है। इसके बाद नवंबर की 15 तारीख तक उत्तर प्रदेश समेत देश भर की सभी मिलें पूरी तरह चालू हो जाती हैं।

चीनी के दामों में आई इस तेजी के पीछे कई मुख्य कारण रहे हैं। इस सीजन के दौरान कर्नाटक और महाराष्ट्र में गन्ने का उत्पादन कम हुआ है। इसके अलावा, सीजन की शुरुआत में बड़े पैमाने पर चीनी का निर्यात किया जा चुका था और लगभग 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी। हालांकि, मई के महीने में सरकार को यह अंदेशा हुआ कि भविष्य में देश के भीतर चीनी की कोई कमी न हो जाए, जिसके चलते सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी थी जो 30 सितंबर तक प्रभावी है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से बाजार में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि देश में पर्याप्त चीनी का भंडार मौजूद नहीं है, जिसके कारण मिल गेट (एक्स-मिल) की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया।

दूसरी ओर, एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी कई सवाल और चर्चाएं सामने आ रही हैं। देश में E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम तयशुदा रूप से चल रहा है, जिसके तहत साल भर में लगभग 1200 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होती है। इसमें चावल, मक्का और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न का भी उपयोग किया जाता है। फसल की पैदावार के हिसाब से इसका उपयोग घटता-बढ़ता रहता है। आगामी वर्ष के दौरान लगभग 285 लाख टन चीनी की खपत का अनुमान लगाया गया है, जिसे ध्यान में रखते हुए पहले घरेलू जरूरतों का इंतजाम किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 40 से 45 लाख टन का बफर स्टॉक भी सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद जो हिस्सा बचेगा, उसी का उपयोग एथेनॉल निर्माण के लिए किया जाएगा। हालांकि, अगले सीजन के लिए गन्ने की कुल उपज का आधिकारिक अनुमान अभी सामने नहीं आया है और अल-निनो के प्रभाव से भी कुछ जोखिम बने हुए हैं। फसल का वास्तविक अंदाजा सितंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते तक ही मिल पाएगा।

बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ISMA ने सरकार के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि मिलें 10 से 15 दिन पहले चालू की जाती हैं, तो शुरुआती चरण में रिकवरी कम मिलने के कारण मिलों को आर्थिक नुकसान (रिकवरी लॉस) उठाना पड़ सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए ISMA ने सरकार से मांग की है कि अक्टूबर महीने में होने वाले उत्पादन पर सेंट्रल जीएसटी में 2.5 प्रतिशत की छूट दी जाए। साथ ही, अक्टूबर के दौरान किए जाने वाले अतिरिक्त उत्पादन के एवज में रिलीज कोटा के तहत अतिरिक्त कोटा प्रदान किया जाए ताकि मिलों को राहत मिल सके और त्योहारी सीजन में आम लोगों को राहत दी जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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