क्या टाटा ग्रुप में छिड़ी 'बोर्डरूम वॉर'?नए बिजनेस के घाटे पर भिड़े दिग्गज, चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर संशय बरकरार
टाटा संस की बोर्ड बैठक में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव टल गया है। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के घाटे और अन्य शर्तों को लेकर सवाल उठाए हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

Chandrasekaran's appointment remains uncertain
मुंबई: भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूह, टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मंगलवार को मुंबई में हुई 'टाटा संस' की बोर्ड बैठक में कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित (Defer) कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कुछ गंभीर मुद्दों पर असहमति जताई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
बैठक में क्या हुआ? असहमति की मुख्य वजह
मंगलवार को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में जब एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मुद्दा उठा, तो टाटा ट्रस्ट्स के नामांकित (Nominee) सदस्य और ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस पर असहमति जताई।
विवाद का मुख्य बिंदु: नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप के 'नए बिजनेस' (New Businesses) में हो रहे घाटे का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष रूप से टाटा न्यू (Tata Neu) और ई-कॉमर्स जैसे डिजिटल वेंचर्स में भारी निवेश के बावजूद मुनाफे की कमी पर सवाल किए। उनका तर्क था कि कार्यकाल बढ़ाने से पहले इन घाटे वाले क्षेत्रों की गहन समीक्षा होनी चाहिए।
चंद्रशेखरन का रुख और बोर्ड का समर्थन
दिलचस्प बात यह है कि एन चंद्रशेखरन ने खुद ही अपनी नियुक्ति पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए कहा। हालांकि, बोर्ड के अन्य सदस्यों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया। अन्य निदेशकों का मानना है कि टाटा ग्रुप के नए निवेश 'ग्रीनफील्ड' (शून्य से शुरू किए गए) हैं और ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में मुनाफा आने में लंबा समय (Gestation Period) लगता है।
नोएल टाटा की चार कड़ी शर्तें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए चार मुख्य शर्तें सामने रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख शर्त टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर है।
- RBI गाइडलाइंस: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, 'अपर-लेयर शैडो बैंकों' (जैसे टाटा संस) को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना अनिवार्य है।
- नोएल टाटा का स्टैंड: नोएल टाटा चाहते हैं कि टाटा संस की लिस्टिंग न हो और इसके लिए कोई अन्य रास्ता निकाला जाए।
रिटायरमेंट पॉलिसी और उम्र का पेच
टाटा संस में गैर-कार्यकारी भूमिकाओं के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष तय है। एन चंद्रशेखरन जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। उनकी दोबारा नियुक्ति के लिए बोर्ड को एक 'विशेष प्रस्ताव' (Special Resolution) पारित करना होगा और मौजूदा रिटायरमेंट नीति में ढील देनी होगी। हालांकि, वर्तमान में घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, यानी उनके पास अभी एक साल का समय शेष है।
2017 से अब तक का सफर
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने:
- ग्रुप की कंपनियों का एकीकरण (Consolidation) किया।
- बैलेंस शीट को मजबूत किया और कर्ज कम किया।
- पूंजी आवंटन (Capital Allocation) में कड़ा अनुशासन लागू किया।
यही कारण है कि बोर्ड का एक बड़ा हिस्सा उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए उपयुक्त मान रहा है।
भविष्य की राह
टाटा संस की यह बैठक इस लिहाज से ऐतिहासिक रही कि इसने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच भविष्य के तालमेल को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि चंद्रशेखरन के पास समय है, लेकिन नोएल टाटा के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि अगले कार्यकाल की राह उतनी आसान नहीं होगी जितनी उम्मीद की जा रही थी। आने वाले महीनों में नए बिजनेस के प्रदर्शन पर ग्रुप की नजर रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
