भारत के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े नीतिगत और व्यापारिक बदलावों के बीच, देश भर में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने वाली अग्रणी कंपनी इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की बिक्री प्रक्रिया अपने सबसे निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे अडानी ग्रुप की एक प्रमुख इकाई सहित कुल चार दिग्गज कॉरपोरेट दावेदारों को इस रणनीतिक अधिग्रहण वार्ता के अगले महत्वपूर्ण दौर के लिए शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है। इस प्रस्तावित वाणिज्यिक सौदे के तहत कंपनी का कुल इक्विटी मूल्यांकन लगभग 400 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 3,770 करोड़ रुपये होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बड़े विनिवेश कदम के बाद देश के पावर डिस्ट्रीब्यूशन और डिजिटल मीटरिंग सेक्टर में कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा के एक नए अध्याय की शुरुआत होने की प्रबल संभावना बन गई है।

व्यावसायिक सूत्रों और बाजार की रिपोर्टों से मिली जानकारी के अनुसार, दूसरे दौर की गहन रणनीतिक और वित्तीय बातचीत में जगह बनाने वाले चार शॉर्टलिस्टेड बोलीदाताओं में देश-विदेश के कई बड़े नाम शामिल हैं। इस रेस में सबसे आगे चल रही अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के साथ-साथ बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जीएमआर स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन भी मजबूती से डटी हुई है। इनके अतिरिक्त, सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड जीआईसी द्वारा समर्थित जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक निवेश क्षेत्र की बड़ी कंपनी स्विट्जरलैंड स्थित फंड पार्टनर्स ग्रुप भी बातचीत के इस अंतिम चरण में अपनी तकनीकी और वित्तीय बोलियों के साथ शामिल हैं। इन चार संभावित खरीदारों को शुरुआती दौर में आई लगभग 10 विभिन्न कंपनियों की प्राथमिक अभिव्यक्तियों की स्क्रूटनी करने के बाद ही चुना गया है।

इस बड़े सौदे की कानूनी और प्रशासनिक समयसीमा की बात करें तो शॉर्टलिस्ट की गई इन चारों कंपनियों ने इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बही-खातों और परिचालन संपत्तियों की वित्तीय तथा कानूनी जांच-परख (ड्यू डिलिजेंस) की प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर गति दे दी है। इसके बाद, उद्योग जगत के नियमानुसार अगले महीने के मध्य तक इन सभी शॉर्टलिस्टेड कंपनियों की ओर से अंतिम और बाध्यकारी (बाइंडिंग) बोलियां प्रस्तुत किए जाने की पूरी संभावना है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस ड्यू डिलिजेंस के पूरा होने के बाद ही कंपनी की वास्तविक देनदारियों और भविष्य के राजस्व प्रवाह का सटीक आकलन हो सकेगा, जो अंतिम बोली की राशि को निर्धारित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के इस रणनीतिक विनिवेश के पीछे का मुख्य प्रशासनिक कारण इसके प्रवर्तकों पर बढ़ता वित्तीय दबाव और ऋण का भारी बोझ माना जा रहा है। वर्तमान में यह कंपनी भारत सरकार के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) और वित्तीय संकट से जूझ रही सरकारी इकाई एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) का एक साझा संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) है। इस उद्यम में एनआईआईएफ के पास 51 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी है, जबकि ईईएसएल के पास शेष 49 प्रतिशत शेयर होल्डिंग है। स्वयं ईईएसएल भी देश की चार प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनियों—एनटीपीसी, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी), रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कॉर्पोरेशन (आरईसी) और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का एक संयुक्त उद्यम है। पिछले वित्तीय विवरणों के अनुसार, ईईएसएल पर 6,045 करोड़ रुपये से अधिक का दीर्घकालिक बकाया कर्ज है, जिसे कम करने के लिए इस संयुक्त उद्यम की हिस्सेदारी का मुद्रीकरण किया जा रहा है।

व्यावसायिक परिचालन के स्तर पर देखें तो साल 2019 में स्थापित हुई इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर ने बहुत ही कम समय में देश के डिजिटल पावर मीटरिंग सेक्टर में अपनी मजबूत धाक जमाई है। कंपनी को देश भर के विभिन्न राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से लगभग 2.2 करोड़ स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के बड़े और दीर्घकालिक ऑर्डर पहले ही मिल चुके हैं। कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड के मुताबिक, वह अब तक पूर्वोत्तर राज्य असम में लगभग 6,00,000 और देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में करीब 5,00,000 स्मार्ट मीटरों का सफल इंस्टॉलेशन पूरा कर चुकी है। इन चालू परियोजनाओं और भविष्य के बड़े ऑर्डर्स के कारण ही देश के बड़े कॉरपोरेट घराने इस कंपनी को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

इस प्रस्तावित सौदे के संपन्न होने के बाद देश के उपभोक्ताओं और बिजली वितरण प्रणाली पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। यदि यह सौदा अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस या किसी अन्य निजी कंपनी के पक्ष में जाता है, तो देश के स्मार्ट मीटरिंग अभियान में निजी पूंजी और अत्याधुनिक वैश्विक तकनीकों का समावेश तेजी से बढ़ेगा। यह कदम भारत सरकार के उस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के भी अनुकूल है, जिसके तहत देश की सभी सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षता में सुधार करने और बिजली चोरी को रोकने के लिए पारंपरिक मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदला जाना है। बहरहाल, अगले महीने आने वाली अंतिम बोलियां ही यह तय करेंगी कि देश के करोड़ों घरों में बिजली की रींडिंग लेने वाले इस बड़े बुनियादी ढांचे की कमान किस कॉरपोरेट घराने के हाथों में सौंपी जाएगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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