Indian Stock Market Crash 2026 : पश्चिम एशिया के धधकते बारूद और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। मंगलवार को दलाल स्ट्रीट पर मानों बिकवाली का सैलाब आ गया, जिसने लगातार दूसरे दिन निवेशकों के भरोसे को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव की आशंकाओं के बीच कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर मंदी के काले बादल छाए रहे और देखते ही देखते बिकवाली ने एक 'पैनिक' का रूप ले लिया। यह केवल एक सामान्य गिरावट नहीं थी, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट की उस आहट का प्रतिबिंब थी, जिसने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है।

कारोबार के अंत में बाजार के आंकड़ों ने जो तस्वीर पेश की, वह बेहद भयावह थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 1,456.04 अंक यानी 1.92 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,559.24 के स्तर पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 ने भी 436.30 अंक यानी 1.83 प्रतिशत गोता लगाया और 23,379.55 के स्तर पर आकर सिमट गया। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो निफ्टी के लिए अब 23,300 का स्तर एक नाजुक सहारा है, जिसके टूटने पर बाजार 23,100 और फिर 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है। दूसरी ओर, ऊपर की तरफ 23,500 और 23,800 के स्तर अब एक अभेद्य दीवार बन गए हैं, जहां भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

सेंसेक्स के 30 दिग्गज शेयरों की बात करें तो तबाही का आलम यह था कि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ही हरे निशान में रहने में सफल रहा, जबकि अन्य सभी 29 कंपनियां लाल निशान के गहरे दलदल में फंसी रहीं। आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टीसीएस के शेयरों में 4.44 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की घबराहट उस वक्त चरम पर पहुंच गई जब स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रति आगाह किया। प्रधानमंत्री ने बढ़ते व्यापार घाटे और महंगे कच्चे तेल के दबाव को देखते हुए जनता से ऊर्जा की खपत, विदेशी दौरों और सोने की खरीद में कटौती करने की भावुक अपील की, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि आगामी आर्थिक राह बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

बाजार में मची इस अफरा-तफरी का सबसे ज्यादा असर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर पड़ा, जो क्रमशः 2.54 और 3.17 प्रतिशत तक टूट गए। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी और रियल्टी सेक्टर ने सबसे ज्यादा चोट खाई, हालांकि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के चलते मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने थोड़ा जुझारूपन दिखाया। दिन के अंत में बाजार का बंद होना केवल एक कारोबारी सत्र की समाप्ति नहीं थी, बल्कि यह आने वाले समय में एक बड़े आर्थिक बदलाव और कठिन सुधारों की आहट थी। पश्चिम एशिया का यह संकट यदि जल्द नहीं थमा, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए आने वाले दिन और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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