सेंसेक्स-निफ्टी पर ग्लोबल टेंशन का बड़ा असर ; ज़ी एंटरटेनमेंट बना स्टार, IT कंपनियां लड़खड़ाईं
भारत के शेयर बाजार में 11 जून 2026 को गिरावट दर्ज की गई, जहां अमेरिका-ईरान तनाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जबकि बैंकिंग सेक्टर ने मजबूती दिखाई। ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरों में बड़ी तेजी रही, वहीं रुपया भी दबाव में रहा।

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट
11 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र का सामना किया, जहां वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी आर्थिक संकेतकों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। दिनभर की अस्थिरता के बाद प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, जबकि बैंकिंग शेयरों ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाकर बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने की कोशिश की।
कारोबार के दौरान निफ्टी 50 लगभग 23,162 अंकों के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं सेंसेक्स करीब 73,900 अंकों के आसपास रहा और इसमें 0.1 से 0.3 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। व्यापक बाजार में भी दबाव बना रहा, हालांकि बैंकिंग शेयरों ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। हालिया घटनाक्रमों के बाद मध्य पूर्व में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित तेल पर निर्भर करता है। बढ़ती तेल कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर दिया।
इसके साथ ही अमेरिका से आए अपेक्षा से अधिक मजबूत मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। निवेशकों को आशंका है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इस संभावना ने उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिनभर के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों में कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े तेजी से बदलते कारोबारी परिदृश्य ने भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर असर डाला। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे पूरे सेक्टर पर दबाव बना रहा।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन कंपनियों पर भी दिखाई दिया जो ऊर्जा लागत के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, रिफाइनर और अन्य तेल-निर्भर उद्योगों के शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। चुनिंदा एआई और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर भी निवेशकों की बिकवाली का शिकार बने।
हालांकि बाजार में कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले। बैंकिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कई प्रमुख निजी व सरकारी बैंक निवेशकों की पसंद बने रहे। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में रुचि बनी रही। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और हालिया सकारात्मक संकेतों के कारण निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर कायम रहा। एफएमसीजी क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने भी स्थिर प्रदर्शन किया। वहीं एथेनॉल से जुड़ी नीतिगत सहायता मिलने के बाद चीनी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इस सेक्टर को अतिरिक्त समर्थन मिला।
कॉर्पोरेट मोर्चे पर ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज बाजार का प्रमुख आकर्षण रहा। कंपनी के शेयरों में 8 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके पीछे फीफा विश्व कप स्ट्रीमिंग अधिकार हासिल करना और 2,300 करोड़ रुपये की फंड जुटाने की योजना प्रमुख कारण रहे। इस खबर ने निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया। दूसरी ओर इंफोसिस और अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन जैसे बड़े शेयर बाजार पर दबाव बनाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे। इन कंपनियों में आई कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण डॉलर की मांग बढ़ने से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जा रहा है।
आगे की दिशा तय करने में निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े नए घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और बैंकिंग सेक्टर की मजबूती पर रहेगी। वहीं यह भी देखा जाएगा कि आईटी सेक्टर पर बना दबाव कब तक जारी रहता है। फिलहाल बाजार का समग्र माहौल सतर्क बना हुआ है। भू-राजनीतिक जोखिम, ऊंची तेल कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार की चाल तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में निवेशक आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए रखेंगे।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
